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अमेरिका से तनाव के चलते ईरान ने उठा लिया ये कदम तो पूरी दुनिया में तेल के लिए हो जायेगा हाहाकार

नई दिल्ली।। ईरान और अमेरिका के बीच जिस तरह से तनाव बढ़ रहा है, उसके प्रभाव से पुरे विश्व में हलचल मचना स्वाभाविक है। हाल ही में सऊदी अरब ने अपने दो तेल टैंकरों को निशाना बनाने की बात कही है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी उनके जहाज़ों पर हमले का दावा किया है। जाहिर है दोनों देशों का इशारा ईरान की तरह है। लेकिन ईरान इस बात को सिरे से नकार रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच इससे पहले भी जब-जब तनाव बढ़ा है तब-तब फारस की खाड़ी में गंभीर परिणाम हुये हैं और उसका असर पूरी दुनिया में देखा गया है। ईरान पहले से भी यह लगातार चेतावनी देता रहा है कि अमेरिका के साथ सैन्य तनाव बढ़ा तो वह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल धमनी कहे जाने वाले हॉर्मूज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा।

गौरतलब है कि कि हॉर्मूज जलडमरूमध्य पर ईरान बार-बार इसलिये दम भरता है क्योंकि यही एक ऐसी जगह है जो पूरी दुनिया के तेल व्यापार पर प्रभाव डालती है। यदि ईरान हॉर्मूज जलडमरूमध्य बंद करता है तो तेल के लिये दुनिया भर में हाहाकार मच जायेगा। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत, कतर और ईरान का ज्यादातर तेल का निर्यात हॉर्मूज जलडमरूमध्य के जरिये ही होता है।

यहां से कम से कम 15 मिलियन बैरल्स प्रतिदिन तेल की सप्लाई होती है और यदि यह बंद होता है तो US, UK समेत कई देशों में तेल की किल्लत हो जायेगी। तेल के दाम तो बढ़ेंगे साथ ही खाड़ी देशों में हालात भी बिगड़ेंगे और संघर्ष की स्थिति पैदा होगी।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी यह स्थिति एक और खाड़ी युद्ध की ओर इशारा कर रही है। यदि ऐसा होता है तो भारत और चीन के लिये भी मुश्किल कड़ी हो सकती है। क्योंकि ईरान से तेल आयात पर अमेरिका द्वारा दी गई छूट खत्म होने के संकट से भारत अभी निपट रहा है। साथ ही उसके सामने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक और चुनौती पैदा हो गई है।

वहीं, भारत और चीन समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था भी इस कारण सुस्त पड़ती जा रही है। ऐसे में वैश्विक तेल व्यापार में कोई भी बाधा विश्व अर्थव्यवस्था के लिये हानिकारक ही होगी।

जानकारों का कहना है कि वर्ष 1980-1988 में ईरान-इराक युद्ध के दौरान दोनों देशों ने एक दूसरे के तेल एक्सपोर्ट को निशाना बनाया था। जिसे मीडिया में टैंकर वॉर नाम दिया गया था। उस समय भी हॉर्मूज जलडमरूमध्य से तेल व्यापार काफी प्रभावित हुआ था।

इसके बाद अमेरिका ने बहरीन में US फिफ्थ फ्लीट (युद्धपोतों के बेड़े) को व्यापारी जहाजों की सुरक्षा के लिये फारस की खाड़ी में उतारा था। US फिफ्थ फ्लीट की यह जिम्मेदारी थी कि हॉर्मूज जलडमरूमध्य में तेल के व्यापार को सुचारू रूप से चलाये।

अमेरिका की बढ़ती दखल अंदाजी के बाद ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को शुरू करने की कोशिश की। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अमेरिका ने इस पर लगाम कस दी। फिर वर्ष 2015 में अमेरिका ने ईरान के साथ किये गये परमाणु करार से खुद को अलग कर लिया था।

यह परमाणु समझौता वर्ष 2015 में ईरान और 6 वैश्विक शक्तियों के बीच हुआ था। इन वैश्विक शक्तियों में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और ईरान शामिल थे। इस परमाणु समझौते के तहत ईरान पर परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी।

यह परमाणु करार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुआ था। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तब उन्होंने ईरान के साथ हुए परमाणु करार से अमेरिका को अलग कर लिया। साथ ही अमेरिका ने ईरान पर फिर से प्रतिबंध थोप दिये। इससे ईरान भड़क उठा और दोबारा न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू करने की बात कही। हालांकि, तेहरान इस बात से इनकार करता रहा है।

मालूम हो कि यह पहला मौका नहीं है जब हॉर्मूज जलडमरूमध्य में संघर्ष की स्थिति बनी है। इससे पहले वर्ष 1988 में अमेरिका के युद्धपोत ने ईरान के एक यात्री विमान को उड़ा दिया था जिसमें 290 लोगों की मौत हो गई थी। हालाँकि इस घटना को वॉशिंगटन ने एक एक्सीडेंट बताते हुये गलती मानी थी। लेकिन ईरान ने इसे जान-बूझकर किया गया हमला बतया था। उस वक्त भी दोनों देशों में तनाव की स्तिथि पैदा हो गयी थी।

वर्ष 2008 में अमेरिका ने यह बयान जारी किया कि अमेरिकी युद्धपोतों को हथियारों से लैस ईरानी नावों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। फिर इसी वर्ष जून में रेवोल्युश्नरी गार्ड के कमांडर इन चीफ मोहम्मद अली जाफरी ने कहा था कि यदि उनके जहाज़ों पर हमला हुआ तो वो हॉर्मूज जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लेंगे।

वर्ष 2010 में जापान के M स्टार ऑइल टैंकर को आतंकी संगठन अब्दुल्लाह अज्जाम ब्रिगेड ने निशाना बनाया था। कई आतंकियों ने जहाज पर हमला कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2012, 2015 में भी ऐसी ही तेल के जहाजों पर हमले होते रहे। फिर वर्ष 2018 में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव उस वक्त फिर बढ़ गया था जब ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की अमेरिका ने धमकी दी थी। तब भी ईरान ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य को बाधित करने की बात कही थी।

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