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इसलिए पैरंट्स को बच्चों को फोन देने से बचना चाहिए, मोबाइल फ़ोन के लती तीन साल के बच्चे की हरकत देखकर डॉक्टरों के भी उड़ गये होश

बरेली।। मोबाइल के इस दौर में इसके जितने लाभ हैं उससे ज्यादा नुकसान देखने को मिल रहे है। मोबाइल का सबसे अधिक असर युवाओं और स्कूली बच्चों में देखने तो मिल रहा है। मोबाइल की लत लगने की बात तो अक्सर सुनने में आती है लेकिन यूपी में बरेली के जिला अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसे देखकर आम लोगों के तो क्या डॉक्टरों तक के होश उड़ गए। यहां एक मां अपने 3 साल के बच्चे को काउंसलिंग सेंटर में लेकर आईं, क्योंकि उनका बच्चा फोन का इतना आदी हो चुका था कि वह टॉइलट जाने तक के लिए नहीं उठता था। तीन साल का बच्चा दिन में करीब 8 घंटे ‘डोरेमान’ और ‘मोटू पतलू’ देखता था। चिंताजनक बात यह है कि ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं।

काउंसलिंग सेंटर में दो महीने में ही ऐसे 39 केस सामने आ चुके हैं जहां 10 से 18 साल के बच्चों को फोन की लत लग चुकी है। जिला अस्पताल के डॉ. आशीष कुमार का कहना है, ‘माता-पिता अक्सर बच्चों को छोटी उम्र में फोन थमा देते हैं ताकि बच्चे उनके काम में डिस्टर्ब न करें। बाद में यह लत बन जाती है बच्चों के बिहेवियर पर असर डालती है।’

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साइकॉलजिस्ट खुश अदा ने बताया कि तीन साल के बच्चे को उसकी मां घर के काम करने के दौरान फोन थमा देती थीं। उसे इस हद तक फोन की लत लग गई थी कि वह बिना फोन लिए पैरंट्स को डॉक्टरों से बात ही नहीं करने दे रहा था। उन्होंने बताया कि ज्यादातर पैरंट्स बच्चों में सिरदर्द और पढ़ाई में मन नहीं लगने जैसी शिकायतें लेकर आते हैं।

हालांकि, उनसे बात करने पर पता चलता है कि बच्चों की इन परेशानियों की जड़ मोबाइल की लत है। कई बार सोशल-मीडिया पर दूसरों की जिंदगियों से अपनी तुलना करने पर वे कुंठित भी हो जाते हैं। घंटों फोन के इस्तेमाल से नींद भी खराब होती है। ये सब चीजें आपस में जुड़ी होती हैं। बच्चे वर्चुअल वर्ल्ड में रहने लगते हैं और पढ़ाई या नींद को नजरअंदाज करते हैं। उनसे फोन लेने पर गुस्सा करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पैरंट्स और बच्चों को डिटॉक्स किया गया।

चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनीत शुक्ला का कहना है, ‘पैरंट्स को बच्चों को फोन देने से बचना चाहिए। उन्हें खिलौनों या पार्क में खिलाना चाहिए था।’ डॉक्टर कुमार ने बताया कि कई युवा डिप्रेशन से बचने के लिए भी फोन पर घंटे लगे रहते हैं। काउंसलर्स ने बताया कि फोनस्क्रीन का कलर ब्लैक एंड वाइट करने से मोबाइल गेम्स में दिलचस्पी घटती है।

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