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इस वजह से मनाया जाता है भाई-दूज का त्योहार, कहानी से सुनकर आखें हो जाएंगी नम

डेस्क ।। bhai dooj भाई-बहन के प्यार का त्योहार 9 नवंबर को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन यमुना तट पर विशेष स्नान का आयोजन होता है, जिसे Yama Dwitiya स्नान कहते हैं।

इस विशेष स्नान की मान्यता ये है कि इस स्नान में भाई-बहन एक-साथ शामिल होकर मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हैं। भाई दूज की वैसे तो आपने बहुत कहानियां सुनी होंगी, लेकिन माना जाता है कि असली भाई दूज की कहानी यमुना से जुड़ी है।

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भाई दूज की असली कहानी यमुना से जुड़ी है। आपको बता दें कि मथुरा में यमराज का मंदिर है। यहां पर भाई-बहन यमराज की पूजा करते हैं। ये पूजा यम्-द्वितीया पर होती है। मथुरा के विश्राम घाट पर एक विशेष स्नान होता है, जिसमे लाखों भाई-बहन एक साथ मिलकर यमुना के जल में स्नान करते हैं और घाट पर ही स्थित यमुना-यमराज मंदिर में पूजा कर मोक्ष-प्राप्ति की कामना करते हैं।

इस स्नान की मान्यता है कि जब सूर्य-पुत्र यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने यहां आये तो यमुना जी ने उनका खूब आदर-सत्कार किया और दोनों ने इसी विश्राम घाट पर स्नान किया था। इससे प्रसन्न हो यमराज ने अपनी बहन से वरदान मांगने को कहा तो यमुना जी ने वरदान मांगा कि इस दिन इस घाट पर जो भाई-बहन मेरे जल से स्नान करेंगे, उनके सारे पाप दूर होकर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।

यमराज का एक मात्र मंदिर है जो इसी विश्राम घाट पर है और स्नान के बाद सभी भाई-बहन इस मंदिर में यमराज की पूजा कर अपने पापों का प्रायश्चित करते है। यही वजह है कि मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ यहां देश-विदेश से लाखों भाई-बहन इस दिन स्नान करने पहुंचते हैं। सुबह चार बजे से शुरू होने वाला यम्-द्वितीया स्नान देर शाम तक चलता है इस बार भाई-दूज दो दिन होने की वजह से कल भी ये विशेष स्नान होगा।

फोटो- फाइल

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