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नोटबंदी के नुकसान तो आपने बहुत जाने, लेकिन इससे 27 फायदे ऐसे हुए, जिसके बारे में जानकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे

नेशनल डेस्क ।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी की घोषणा के दो साल पूरे हो गए हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपनी सफलता बताया है, कांग्रेस इसके खिलाफ काला दिवस मना रही है।

ये तो नोटबंदी यानी डिमॉनेटाइजेशन के बाद मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने इसका फायदे भी देखे तो कईयों ने नुकसान गिनाए। आइए जानते हैं नोटबंदी के दो साल बीतने के बाद इसके क्या प्रभाव और फायदे रहे।

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  • नोटबंदी के बाद से अब तक 56 लाख नए करदाता जोड़े गए।
  • करदाताओं की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 26 लाख हो गई।
  • आयकर रिटर्न जमा करने वालों में जहां पिछले वर्ष 9.9 फीसदी का इजाफा हुआ था, इस बार यह बढ़कर 24.7 फीसदी हो गया।
  • नेट करेंसी सर्कुलेशन 21 फीसदी तक कम हो गया। यानी चलन में 3 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
  • ब्याज दरों में 100 बीपीएस तक की कमी आई।
  • प्लास्टिक मनी (डेबिट-क्रेडिट) कार्ड्स से होने वाले लेनदेन में 65 फीसदी बढ़ोतरी हुई।
  • बैंकिंग प्रणाली में जमा की गई रकम 3 लाख करोड़ तक बढ़ी।
  • 16,000 करोड़ रुपये बैंकों में वापस नहीं आए।
  • 4.73 लाख संदिग्ध लेनदेन की पहचान हुई।
  • 3 लाख से ऊपर के सभी लेनदेन जांच के दायरे में हैं।
  • ज्वेलरी की मांग में 80 फीसदी तक की उछाल आया।
  • डिजिटल लेनदेन में 56 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई।
  • मैनेजमेंट ऑफ म्यूचुअल फंड्स के अंतर्गत पूंजी 54 फीसदी तक बढ़ी।
  • 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआईसी से जोड़ा गया।
  • देश के 73.62 करोड़ खातों से 52.4 करोड़ आधार संख्या जोड़ी गईं।
  • पीएमजीकेवाई योजना के तहत 21 हजार लोगों ने 4,900 करोड़ की घोषणा की।
  • देश के 34 बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट जांच के घेरे में हैं।
  • अनियमितताओं के आरोप में 460 बैको को दंडित किया गया।
  • बेवजह रकम निकालने वाली 5,800 कंपनियां सरकारी निगरानी के दायरे में हैं।
  • 25 लाख से ज्यादा की रकम जमा करने वाले 1 लाख 16 हजार लोगों को नोटिस दिए गए।
  • 1 करोड़ से ज्यादा जमा करने वाले 5000 लोगों को नोटिस भेजे गए।
  • 5.56 लाख ऐसे लोगों की पहचान हुई जिनके द्वारा जमा की गई रकम उनकी आय से ताल्लुक नहीं रखती थी।
  • 35 हजार शेल कंपनियों को खत्म कर दिया गया।
  • 2.1 लाख शेल कंपनियों को गैर-पंजीकृत कर दिया।
  • 3.09 लाख बोर्ड डायरेक्टर्स अयोग्य करार दिए गए।
  • धारा 132(4) के अंतर्गत 42.448 करोड़ की अघोषित आय स्वीकृत की गई।
  • 2.89 लाख करोड़ रुपये के नगद लेनदेन आयकर की जांच के दायरे में हैं।

फोटो- फाइल

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