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यदि आपके साथ भी हो रहा है कुछ ऐसा तो डॉक्टर से करें संपर्क!

डेस्क. हमारे शरीर में रोग के दो स्थान हैं मन और शरीर यदि मन विकृत होता हैं तो उसका प्रभाव शरीर पर भी पड़ता हैं और शरीर रुग्ण हो तो उसका प्रभाव मन पर भी पड़ता हैं। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हम यदि शरीर से स्वस्थ्य और यदि मन दुखी हैं या मन प्रसन्न हैं और शरीर कष्ट में हैं तो उसे हम स्वस्थ्य नहीं कह सकते। दोनों के साथ इन्दिर्य और आत्मा का भी स्वस्थ्य होना ही स्वस्थ्य कहलायेगा।

वर्तमान में हम अनेकों ज्ञात और अज्ञात बिमारियों से ग्रस्त हैं , मानसिक रोगों का प्रचलन बहुतायत से हो रहा हैं और मजेदार बात मानसिक रोगी अपने को रोगी नहीं समझता ,उसके लिए कुछ सामान्य लक्षण बताये जा रहे ,यदि किसी में ये दिखे तो हमें उसको गंभीरता से लेकर सहयोग और उपचार कराना चाहिए।

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मानसिक विकार यानी कि दिमाग से जुड़े विकार जोकि विभिन्न प्रकार के होते है। आम व्यक्ति को भी कुछ छोटे-मोटे दिमागी विकार हो सकते हैं ,जिसे हो सकता है कि वे सामान्य मानते हो लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि वे सामन्य ही हो। कई बार कुछ सामान्य सी दिखने वाली आदतें मानसिक विकार की ओर इशारा करती है। हम आपको बता रहे हैं ऐसे संकेतों के बारे में जो मानसिक विकार की ओर पहला इशारा हो सकते हैं –

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1- दुखी महसूस होना और किसी चीज से खुशी न मिलना
2- किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
3- छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा डर लगना और चिंता होना
4- मूड में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होना
5- दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने का मन न करना
6- सोने में परेशानी होना, बिना कुछ किए थकान महसूस होना और ऊर्जा में कमी आना
7- रिऐल्टी से दूर होना और इमेजिनेशन सोच पर हावी होना व उसे रिऐल्टी समझना
8- दूसरों की स्थिति को समझने में परेशानी होना
9- ड्रग्स लेना या शराब का बहुत ज्यादा सेवन करना
10- किसी भी बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आना, चीजें तोड़ देने, किसी को मारने लगना। यहां तक की खुद को नुकसान पहुंचाने की सोचना व आत्महत्या तक का ख्याल आना।

इसके बाद उसको अपने विश्वास में लेकर पहले उसकी परामर्श कराये और उसको सत्साहित्य को पढ़ने दे और सबसे बुनियादी बात उसके कारणों को समझे। कारण को दूर करने का प्रयास करे। जरुरत पड़े तो कुशल मनोराग या स्नायु तंत्र विशेषज्ञ से परामर्श समय पर ले अन्यथा रोग असाध्यता की और बढता हैं
उचित समझे तो उसके लिए स्थान परिवर्तन करे ,धरम ध्यान ,योग में उसको प्रवत्त करे ,परिवार से सभी जन उसके साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करे उसकी उपेक्षा या हंसी ,मजाक न उड़ाएं। यदि कोई व्यसन करता हो तो उसे धीरे धीरे छुड़ायें।

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