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CAG रिपोर्ट: लाखों कर्मचारियों की पेंशन के लिये वेतन से कटी रकम ‘गायब’, अटेवा ने कहा सबसे बड़ा घोटाला

नई दिल्ली।। नौकरी से रिटायर्ड कर्मचारियों का जीवन पूरी तरह से पेंशन पर टिका होता है। सरकारी कर्मचारियों की मेहनत से कमाई गयी तनख्वाह का एक अच्छा खासा भाग पेंशन के नाम पर काटा जाता है। कर्मचारी पेंशन को अपनी बुढ़ापे की लाठी का सहारा मानकर अपना पेट काटकर भी इसमें पैसै जमा करतें हैं। लेकिन अगर उनकी इसी रकम में गोलमाल हो जाये तो उन पर क्या बीतेगी? एेसा ही कुछ हुआ है यूपी के सरकारी कर्मचारियों के साथ। यह खुलासा देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी CAG यानि कैग की एक रिपोर्ट मे हुआ है।

CAG की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में लाखों सरकारी कर्मचारियों की पेंशन में भारी घोटाले की बात सामने आयी है। उनके पेंशन के लिये वेतन से कटी रकम ही ‘गायब’ है। यूपी में नई पेंशन व्यवस्था(NPS) के तहत 3 साल में राज्य कर्मचारियों के वेतन से कितनी धनराशि काटी गई और सरकार ने कितना जमा किया इसमें भारी हेराफेरी का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, इसका कोई सही ब्यौरा ही उपलब्ध नही है। बात यहीं खत्म नहीं होती है। बाद के वर्षों में भी जो धनराशि उनके वेतन से कटी उसे भी ठीक से संबंधित खाते में जमा नहीं किया गया है।

CAG की वर्ष 2018 की रिपोर्ट नंबर एक के मुताबिक, नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत यूपी में कर्मचारियों के वेतन से 2005 से 2008 तक हुई कटौती की धनराशि का ब्यौरा ही उपलब्ध ही नहीं है। कितनी धनराशि सरकार ने काटी और कितना अंशदान सरकार ने किया, यह ब्यौरा तक उपलब्ध नही है। यह भी नहीं पता चला कि अगर कटौती हुई तो उससे अर्जित NSDL में जमा हुआ या नहीं। इन तीन वर्षों में कितनी धनराशि का निवेश हुआ यह भी नहीं पता चल सका।

वर्ष 2008 से 09 के बीच सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के लिये वेतन से 2830 करोड़ रुपये की कटौती हुई। जिसके लिये राज्य सरकार ने सिर्फ 2247 करोड़ रुपये अंशदान किया। कर्मचारी और सरकारी अंशदान मिलाकर 2008 से 09 से लेकर वर्ष 2016-17 के बीच कुल 5660 करोड़ रुपये जुटे। इसमें से सिर्फ 5001.71 करोड़ रुपये ही सरकार ने पेंशन वाले खाते में भेजा। बाकि के 545.68 करोड़ रुपये भेजा ही नहीं गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि वर्ष 2015-16 में कर्मचारियों का अंश जो 636.51 करोड़ था, वह वर्ष 2016-17 में 199.24 करोड़ हो गया। इस पैसे के ट्रांसफर में बड़ा खेल हुआ है।

CAG ने नई पेंशन योजना में यूपी में हुये इस घपले पर तत्काल कार्रवाई की सिफारिश करते हुये राज्य सरकार से कहा है कि इस बाबत तत्काल कार्रवाई की जाये। सभी कर्मचारियों को नई पेंशन स्कीम से जोड़ते हुये यह सुनिश्चित किया जाये कि उनके वेतन से जितनी धनराशि की कटौती हो रही है। साथ ही जितनी धनराशि सरकार जोड़ रही है, वह समय से NSDL खाते में पहुंच रही है या नहीं।

गौरतलब है कि, नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत राजकीय कर्मचारी के वेतन से होने वाली 10 फीसदी कटौती को सरकार बाजार में लगाती है। फिर उससे होने वाले लाभ के आधार पर ही सरकारी कर्मचारी को रिटायरमेंट पर पेंशन मिलेगी। राज्यकर्मी नई पेंशन स्कीम को घाटे का सौदा मानते हैं। उनका कहना है कि पुरानी व्यवस्था के तहत सब कुछ निश्चित होता था। लेकिन नई पेंशन स्कीम के तहत हानि-लाभ सब बाजार पर निर्भर करता है। बाजार में अगर शेयर गिरेंगे तो नुकसान होगा। एेसे मे बुढ़ापे मे किसी का भविष्य सुरक्षित नही है।

सभी कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार की नई पेंशन स्कीम का विरोध कर इसे कर्मचारियों के साथ धोखा बताया है और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली की मांग की है। पुरानी पेंशन की मांग को लेकर, सबसे लंबे समय से आंदोलनरत संगठन अटेवा के अध्यक्ष विजय कुमार बंधूजी ने कहा कि यह गोलमाल तो अभी यूपी मे सामने आया है। जबकि देश के हर राज्य मे इससे बड़ा गोलमाल कर्मचारियों की पेंशन की धनराशि मे किया जा रहा है। उन्होने तत्काल इसकी जांच की मांग करते हुये इसे देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया है।

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