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पढ़ना-लिखना सीखो, ओ वोट देने वालों

आप लोगों ने एक जिंगल जरूर सुना होगा। ये कुछ यूँ था-पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालों….मैं इसकी शब्दावली थोड़ी सी बदलता हूँ। इसे अब यूँ पढ़ें- पढना-लिखना सीखो, ओ वोट देने वालों। आंखें बंद करके नहीं आंखें खोलकर चलने में खतरे कम होते हैं। मैं आज पुनः देश की कुछ सच्चाई से आपको रूबरू कराना चाहता हूँ। बहुत सी ...

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मकडजाल में फंस चुके हैं कई महारथी, तोता खोले बैठा है फाइल, अखिलेश यादव को हो सकता है फायदा!

जनता में बढ़ती नाराजगी, दलितों को साधने की कोशिश में रूठ बैठा सवर्ण व ओबीसी वोट बैंक, साढ़े चार साल की हवाई-हंकाई से हलकान भाजपा अब अपने तरकश के सभी तीर निकाल चुकी है। देश की एक तोता जांच एजेंसी का भी इस्तेमाल बखूबी हो रहा है। इस मायावी तोते से किसी दल को तुडवाकर चाहे किसी नई पार्टी का ...

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ब्लैक मनी का अटल सच: मोदी जी !!!! रूहें भी हिसाब मांगतीं हैं…

आज फिर से जो लिख रहा हूँ वो चुभने वालों को चुभेगा लेकिन चिंतन-मनन करने वाले लोग मेरे कथन पर एक बार विचार जरूर करेंगे। नोटबंदी एक राजा की सनक का परिणाम नहीं थी बल्कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था। यह इसलिए रचा गया था ताकि उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में टक्कर देने वाले क्षेत्रीय दलों की ...

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चीन से ऐसे ही आंख मिलानी थी क्या?

इस वक्त पूरे देश में अजीब से हालात हैं । “भक्ति भाव” से इतर सोचिए तो हमने चीन की आंख में आंख डालने की जो बात चुनाव से पहले अभिभूत होकर सुनी थी, उसका सच यह है कि चीन भारत से चार चार हाथ चढ़कर बात कर रहा है। हाल ही में भारत के विदेश सचिव का एक गंभीर बयान ...

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…माफ करना, तो हम भी आप जैसे मरियलों व कायरों के साथ क्यों रहें?

  नज़ीर मलिक।। कैराना और नूरपुर उपचुनाव को ले कर खबरें बहुत चौकाने वाली हैं। इन दोनों उप-चुनावों में मुस्लिम व दलित बाहुल्य इलाकों की चार सौ ईवीएम अगर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 या तीन बजे तक खराब हो जाएं तो भला कौन रोजेदार इसके बाद वहां वोट डालने के लिए रुका रहेगा इन दोनों क्षेत्रों में ऐसा ...

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फ्रीलांसर बनके फ्री में पत्रकारिता कीजिए, अब आप भी बरफ बेचकर घर चलाइये, क्योंकि…

नवेद शिकोह (स्वामी नवेदानंद) लखनऊ।। अखबारों के बड़े पत्रकार छोटे अखबारों के छोटे पत्रकारों पर छींटाकशी करते रहते हैँ। उनका एक ताना तकियाकलाम बन गया है- “अब तो बर्फ बेचने वाले भी राज्य मुख्यालय पत्रकार बन गये हैं। ये ताना सही है या गलत।आज बात इस पर नहीं होगी बल्कि ताना देने वाले बड़े अखबारों और बड़े पत्रकारों के अंधकारमय ...

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