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इस शासक ने भारत में सर्वप्रथम चलवाया था रुपया, जानिए इस शासक के बारे में-

अजब-गजब ।। 1540 ईस्वी में शेरशाह ने बिलग्राम/कन्नौज के युद्ध में हुमांयू को परास्त कर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा कर लिया। अफगान वंशी शेरशाह ‘सूर साम्राज्य’ का संस्थापक था। आइये जानते हैं इस शासक के बारे में।

शेरशाह का जन्म 1472 ईस्वी में बजवाड़ा (होशियारपुर) में हुआ था। शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खान था। फरीद खान (शेरशाह) ने एक शेर से मुठभेड़ के दौरान अपने तलवार के एक ही वार से शेर को मार डाला था। उसकी बहादुरी से गदगद होकर बिहार के तत्कालीन अफगान शासक सुल्तान मोहम्मद बहार खान ने उसे ‘शेरखान’ की उपाधि से नवाजा था।

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शेरशाह ने डाक प्रथा का प्रचलन किया था। पट्टा प्रथा और कबूलियत प्रथा की शुरुआत भी शेरशाह द्वारा की गई। शेरशाह ने 1541 ईसवी में पाटलिपुत्र को पटना के नाम से पुनः स्थापित किया था। शेरशाह ने प्रसिद्ध ग्रैंड ट्रंक रोड की मरम्मत कराई थी। शेरशाह ने सर्वप्रथम 178 ग्राम चांदी का ‘रुपया’ एवं 380 ग्राम तांबे के ‘दाम’ चलवाया।

शेरशाह ने करीबन 1700 सराय और चार बड़ी सड़कों का निर्माण करवाया। शेरशाह का अंतिम सैन्य अभियान ‘कलिंजर का अभियान’ था। शेरशाह की मृत्यु 22 मई 1545 स्वीको कालिंजर किले से टकराकर लौटे एक गोले के विस्फोट से हो गई। शेरशाह के उत्तराधिकारी अयोग्य साबित हुए वे सी ऐसा द्वारा स्थापित साम्राज्य की ना तो सुरक्षा कर सके न ही विस्तार।

फोटो- फाइल

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