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UP: खासमखास संविदाकर्मी की सैलरी बढाने को NHM ने लगाया एड़ी चोटी का जोर, कारनामें को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश

 

लखनऊ।। बीते महीनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा पर कार्यरत उन कंसलटेंट की पत्नियों की सैलरी में बेतहाशा इजाफा पर रोक लगा दिया गया था। जिनके पति NHM मुख्यालय में कंसलटेंट के पद पर कार्यरत हैं। मिशन निदेशक पंकज कुमार ने उनकी सैलरी बढाए जाने का औचित्य जानने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा। पर तब संयुक्त निदेशक, कुष्ठ, सुनील भारती की आख्या पर डीजी हेल्थ ने अपनी संस्तुति नहीं दी थी। इसके बावजूद उन कंसलटेंट की पत्नियों की सैलरी बढाए जाने के लिए यह पत्र मिशन मुख्यालय भेज दिया गया। पर इस पर बात नहीं बनी तो अब मिशन के उपमहाप्रबंधक, राष्ट्रीय कार्यक्रम डा निशांत गौरव भारद्वाज ने इसकी रुचि दिखाई है। उन्होंने सुनील भारतीय को पत्र लिखकर उनकी आख्या पर डीजी हेल्थ स्तर से संस्तुति मांगी। सुनील भारती की मिलीभगत से यह संस्तुति मिशन मुख्यालय पहुंचा भी दी गई है।

इस बार उपमहाप्रबंधक राष्ट्रीय कार्यक्रम की तरफ से संयुक्त निदेशक, कुष्ठ, सुनील भारती को जो पत्र लिखा गया है। उसमें वित्तीय वर्ष 2018—19 में BFO Cum AO आफिसर एनएलईपी के मानदेय के पुनरीक्षण की बात कही गई है। मजे की बात यह है कि जिलों से लेकर मुख्यालय तक सैकड़ों संविदाकर्मी वर्षों से अपना मानदेय बढाने की आला अफसरों से गुजारिश करते रहे हैं। पर उनकी आवाज का अफसरों के कानों पर कोई असर नहीं पड़ा। इसको लेकर स्वास्थ्य मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन तक हो चुका है। ऐसे में मिशन मुख्यालय में तैनात उन कंसलटेंट के पत्नियों की सैलरी बढाये जाने के बाबत स्वास्थ्य महकमे के आला अफसरों की सजगता और सतर्कता संदेह खड़े कर रही है। विभागीय जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य महकमे के आला अफसरों को अंधेरे में रखकर संयुक्त निदेशक, कुष्ठ, सुनील भारती की मिलीभगत से इस कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है।

क्या है मामला

दरअसल, बीते महीनों आदर्श आचार संहिता के दरम्यान एकाएक उन कंसलटेंट की पत्नियों की सैलरियों में आनन फानन में बेतहाशा इजाफा कर दिया गया था जो मिशन मुख्यालय में तैनात हैं। उनकी सैलरी पहले से दोगुनी या डेढ गुनी बढाई गई थी। जबकि नियमों के मुताबिक संविदा कर्मियों की सैलरी में एक साल की सेवा पूरी होने पर 5 फीसदी ही बढोत्तरी की जा सकती है। upkiran.org में खबर प्रकाशित होने के बाद मिशन मुख्यालय में हड़कम्प मच गया। चहेतों को रेवड़ी बांटने के लिए किए गए आदेश में अपनी गर्दन फंसती देख अफसरों ने मानदेय बढाने संबंधी आदेश की समीक्षा का निर्णय लिया और 13 अप्रैल को एक नया आदेश जारी कर 27 मार्च को मानेदय बढाने संबंधी जारी पुराने आदेश को स्थगित कर दिया था। बाद में मिशन निदेशक की तरफ से मानदेय बढाने का औचित्य संबंधी पत्र डीजी हेल्थ को भेजा गया था। जिस पर संयुक्त निदेशक, कुष्ठ, सुनील भारती और संबंधित योजनाओं के कर्ताधर्ताओं ने अपनी मुहर लगा कर फाइल आगे बढा दी। फिर अपनी करतूतों को अंजाम तक पहुंचाने में जुटे जिम्मेदार शासन के अफसरों को खुश करने की पुरजोर कोशिश करने लगे। पूरा जोर इस पर लगाया जा रहा है कि किसी तरह खासमखास संविदा कर्मियों की सैलरी बढवा दी जाए और इस कार्यवाही को कानूनी जामा भी पहना दिया जाए ताकि उनकी सेहत पर इसका असर नहीं पड़े।

जानकारों का कहना है कि यह जिम्मेदार आला अफसरों को भी अंधेरे में रखकर सैलरी बढाने के बाबत उनकी संस्तुति ले सकते हैं। मिशन के विशेष चेहेतों की सैलरी बढाए जाने के लिए इसे एक अभियान का रूप दे दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह सब उच्चाधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है। पीआईपी के जरिए मानदेय बढाने का प्रस्ताव पेश किया गया। इसमें तमाम संविदाकर्मियों की सैलरी बढाने का प्रस्ताव आरओपी के जरिए आया है। पर सैलरी सिर्फ उन्हीं दो कंसलटेंट की पत्नियों की बढाई जा रही है। जिनको उच्चाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। योजना में कार्यरत चालक की पीआईपी के माध्यम से 2015 में 26 हजार रूपये मानदये देने का प्रस्ताव आया था। पर चार साल से वह जमीन पर नहीं उतर सका है। वह 14 हजार रूपये में ही अब तक अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहा है। तमाम संविदाकर्मी इसके उदाहरण है। विभागीय जानकारों का कहना है कि योगी सरकार में एनएचएम में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। चूंकि चुनाव का समय है वजीर अपने चुनावी आयोजन में व्यस्त हैं। इसलिए इसकी आड़ में अफस मनमानी कर रहे हैं और चहेतों को रेवड़ियां बांट रहे हैं।

पति है मिशन मुख्यालय में कंसलटेंट

NELP कार्यक्रम में बीएफओ कम एडमिन आफिसर के पद पर नियुक्त संविदाकर्मी मीनाक्षी द्विवेदी की सैलरी 33 हजार से बढकर 46 हजार हो गई थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि मीनाक्षी द्विवेदी ने बीते 11 मार्च को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय को पत्र लिखकर 10 प्रतिशत लायबिलिटी बोनस और 5 प्रतिशत मानदेय बढाने का अनुरोध किया था। इस पत्र के जवाब में महाप्रबंधक राष्ट्रीय कार्यक्रम डा अश्विनी कुमार ने संयुक्त निदेशक, कुष्ठ को पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगा और इसके तुरंत बाद 27 मार्च को उनकी मानदेय में बेतहाशा बढोत्तरी कर दी गई। मीनाक्षी द्विवेदी के पति अभय द्विवेदी Non communicable disease में कंसलटेंट हैं।

rationalisation की आड़ में चल रहा गोरखधंधा

विभागीय जानकारों का कहना है कि चहेते संविदाकर्मियों की सैलरी बढाए जाने का गोरखधंधा rationalisation प्रक्रिया की आड़ में चल रहा है। rationalisation के लिए पत्र भी भेजा गया था। पर उस पर हुई कार्रवाई का अब तक पता नहीं है।

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