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केंद्रीय कैबिनेट शनिवार को 12 साल तक के बच्चों से रेप के दोषियों को फांसी की सजा संबंधी अध्यादेश जारी कर सकती है। सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को भी इस बारे में सूचित किया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। पोक्सो एक्ट में बदलाव करने की कवायद शुरू हो गई है। इस संबंध में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा लिखी चिट्ठी पीठ को दी।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में नाबालिग से रेप के बाद देश में भड़के गुस्से के चलते सरकार यह अध्यादेश ला रही है, ताकि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंस एक्ट (पोक्सो) में बदलाव किया जा सके। वर्तमान पोक्सो कानून में गंभीर मामलों में न्यूनतम सात साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। इससे पहले दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया केस के बाद आपराधिक कानून में बदलाव किए गए थे। इसमें महिला की मृत्यु या मरणासन्न अवस्था में पहुंचने पर ही फांसी का प्रावधान था।

पहले के रुख से उलट है पक्ष 

केंद्र सरकार का यह पक्ष पहले से बिल्कुल उलट है। सरकार ने इन मामलों में फांसी की सजा के प्रावधान का विरोध किया था। सरकार ने कहा था कि हम समस्या का समाधान फांसी की सजा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में गुहार की गई है कि बच्चों से बलात्कार मामले में फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिए।  

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