भारत की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी, इस बात से रहे दूर वरना…

भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी राजनयिक को तलब कर जम्मू कश्मीर के नगरोटा में आतंकियों से हुई मुठभेड़ के मामले में सख्त विरोध दर्ज कराया है।

भारत ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी राजनयिक को तलब कर जम्मू कश्मीर के नगरोटा में आतंकियों से हुई मुठभेड़ के मामले में सख्त विरोध दर्ज कराया है। इस मुठभेड़ में चार आतंकी मारे गए थे, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद से था। बीते दिन शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह सामने आया था कि यह लोग 26/11 जैसी कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

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विदेश मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी राजनयिक को आज तलब किया गया और नगरोटा में हमले के प्रयास की आतंकी कोशिश पर सख्त विरोध दर्ज कराया गया। इस हमले को भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता के चलते रोका गया है। साथ ही कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के लिए दृढ़ और संकल्पबद्ध है।

मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तानी राजनयिक से यह मांग की गई है कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से सक्रिय आतंकवादियों और आतंकी समूहों का समर्थन करने की अपनी नीति छोड़ दे और अपनी जमीन से अन्य देशों पर हमले के लिए आतंकवादी संगठनों की ओर से संचालित बुनियादी आतंकी ढांचे को नष्ट करे। इस दौरान भारत ने अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया कि पाकिस्तान अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करे ताकि उसके किसी भी क्षेत्र का भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए उपयोग न होने दिया जाए।

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि 19 नवम्बर,2020 को जम्मू और कश्मीर के नगरोटा में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों में हमलावर पाकिस्तान स्थित संयुक्त राष्ट्र व कई देशों द्वारा घोषित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य होने का संकेत मिला है। भारत सरकार ने देश के खिलाफ जैश के लगातार हो रहे आतंकी हमलों पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की।

जैश अतीत में भारत में कई हमलों का हिस्सा रहा है, जिसमें फरवरी 2019 में पुलवामा हमला भी शामिल है। हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का विशाल समान जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा को अस्थिर करने और स्थानीय जिला विकास परिषद चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने के एक बड़े हमले की विस्तृत योजना थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में हुए आतंकी हमले की साजिश को नाकाम किए जाने के बाद गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, शीर्ष खुफिया अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में शीर्ष खुफिया नेतृत्व ने यह बताया था कि आतंकवादी 26/11 की बरसी पर कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे थे।

प्रधानमंत्री ने बैठक के कुछ देर बाद ट्वीट कर कहा था कि हमारे सुरक्षा बलों ने एक बार फिर अत्यंत बहादुरी और कार्यदक्षता का प्रदर्शन किया है। उनकी सतर्कता के कारण जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निशाना बनाने की एक नापाक साजिश को नाकाम किया गया।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के नगरोटा इलाके में गुरुवार को सुरक्षा बलों ने ट्रक में छिपकर जा रहे जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को मार गिराया था। केन्द्रीय जांच एजेंसी अब इस मामले की जांच में जुटी है। जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले आतंकियों की राज्य में बड़ी आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की साजिश थी।

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