महंत नृत्य गोपाल दास ने बताया कि राम जन्म भूमि न्यास की निगरानी में होगा राम मंदिर का निर्माण

राम जन्म भूमि न्यास की निगरानी में राम मंदिर के लिए काम हो रहा है. न्यास के प्रमुख नृत्य गोपाल दास ने कहा है कि आगे भी न्यास की निगरानी में ही मंदिर निर्माण होगा. सरकार जो ट्रस्ट बनाएगी वो भी न्यास के साथ ही मिलकर काम करेगा. बता दें सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि सरकार तीन महीने के भीतर मंदिर बनाने और प्रबंधन के लिए ट्रस्ट बनाए.

नृत्य गोपाल दास ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट के अनुसार उन्होंने फैसले में कहा है कि एक विशिष्ट लोगों का ट्रस्ट तैयार किया जाए. उसके माध्यम से ही मंदिर निर्माण का काम होगा. अभी रामजन्मभूमि न्यास इस काम को कर रहा है. इसमें और लोगों को मिला लिया जाएगा. राम जन्मभूमि न्यास के माध्यम से ही मंदिर निर्माण का कार्य होगा.”

मुस्लिम पक्ष की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर ना होने को लेकर उन्होंने कहा, ”इस फैसले के लिए मुस्लिम पक्ष का बहुत बहुत धन्यवाद. मुसलमान हमारे देश के हमारे भाई, उन्होंने जो साथ दिया है काम को पूर्णता की ओर से बढ़ाने का, इसके लिए हम उन्हें धन्यवाद और आशीर्वाद देते हैं.” ओवैसी के बयान पर उन्होंने कहा कि वो हमेशा राजनीति करने के लिए ऐसे बयान देते रहते हैं, ऐसी बातों का कोई महत्व नहीं है.

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है क्या ?
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सिर्फ 43 मिनटों में भारत के सबसे लंबे मुकदमे का फैसला पढ़ दिया. 40 दिनों की सुनवाई के दौरान इस विवाद से जुड़े सभी पक्षों ने अपनी दलीलें रखी थीं, कोर्ट ने आज उन तमाम दलीलों और सबूतों का जिक्र भी फैसला पढ़ते हुए किया. कोर्ट के फैसले मुताबिक निर्मोही अखाड़ा जमीन पर कब्जे के अपने दावे को साबित नहीं कर पाया, इसलिए उनके दावे को खारिज कर दिया गया.

2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला को मिली यानी अयोध्या में जन्मस्थान पर ही मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया. मंदिर बनाने की जिम्मेदारी एक ट्रस्ट को मिलेगी. केंद्र सरकार को 3 महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया. केंद्र चाहे तो जमीन के हक से बाहर किए गए निर्मोही अखाड़े को मंदिर के ट्रस्ट में जगह दे सकता है.

वहीं मुस्लिम पक्ष को किसी और जगह पर 5 एकड़ जमीन देने के लिए कहा गया है. सरकार तय करेगी कि ये जमीन अधिगृहीत जमीन के अंदर हो या अयोध्या में ही किसी और जगह पर होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर मुस्लिम पक्ष को जमीन दी.

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