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लाहौर ।। पाकिस्तान की खस्ताहालत के किस्से आए दिन अखबारों में छपते रहते हैं। लेकिन जितना दिखाई देता है उससे कहीं ज्यादा पीछे है पाकिस्तान। हाल में रिपोर्ट आई थी वहां के करोड़ों लोगों को इंटरनेट के बारे में पता तक नहीं है। अब ताजा जानकारी के मुताबिक वहां करोड़ से अधिक लड़कियां ऐसी है जिन्हें शिक्षा तो दूर स्कूल की शक्ल तक देखने को नहीं मिली है।

करीब 20.7 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में लगभग आठ करोड़ बच्चे स्कूल जाने की उम्र वाले हैं। इनमें से 2.25 करोड़ ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें स्कूल मयस्सर नहीं हैं। सरकार द्वारा शिक्षा पर कम खर्च के चलते हालात ऐसे हैं कि एक करोड़ से ज्यादा लड़कियां स्कूल नहीं जा पा रही हैं।

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मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी ताजा रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा को लेकर पाकिस्तान की तस्वीर पेश की है। 111 पन्नों वाली इस रिपोर्ट का शीर्षक है, ‘मैं अपनी बेटी को खिलाऊं या फिर उसे पढ़ाऊं : पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा में बाधाएं।’ रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने 2017 में अपनी जीडीपी का 2.8 प्रतिशत से भी कम शिक्षा पर खर्च किया जबकि मानकों के मुताबिक 4 से 6 प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की जाती है।

2012 में चरमपंथियों ने पाकिस्तान में लड़कियों को पढ़ाने की पैरवी कर रही मलाला यूसुफजई पर जानलेवा हमला किया था। कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़े होने वाली मलाला सिर्फ 17 साल में शांति का नोबल पुरस्कार पाकर पूरे विश्व में छा गई थीं। अब मलाला इंग्लैंड में रहकर दुनियाभर में बच्चों और खासकर लड़कियों की शिक्षा के लिए जागरुकता फैला रही हैं।

फोटो- फाइल