उत्तर प्रदेश ।। फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाले 127 शिक्षकों को सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। बेसिक विभाग द्वारा की गई जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बता दें कि इससे पहले भी अक्टूबर महीने में एसटीएफ ने इसी जिले से चार फर्जी शिक्षकों को गिरफ्तार किया था। इसी के बाद एजेंसी ने बेसिक शिक्षा विभाग से दस्तावेज जांचने को कहा था।

बर्खास्त किये इन 127 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ अभी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस संबंध में एसटीएफ के अधिकारी लगातार शिक्षा विभाग के अफसरों के संपर्क में हैं। जानकारी के मुताबिक बलरामपुर के बीएसए ने एसपी बलरामपुर को 127 में से सिर्फ 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज के संबंध में पत्र भेजा है।
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वहीं सीतापुर में एक ही पहचान पर नौकरी कर रहे दो फर्जी शिक्षकों का खुलासा हुआ है। एसटीएफ की पड़ताल के आधार पर शिक्षा विभाग ने जब जांच करवाई तो यह सच्चाई सामने आई। दोनों को बर्खास्त करने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। दोनों लापता है। इनमें से एक प्रधानाध्यापक व एक सहायक अध्यापक के पद पर काम कर रहा था। जिस शिक्षक के नाम पर दोनों नौकरी कर रहे थे, वह गोरखपुर के बड़हलगंज में तैनात है।
गोरखपुर के बड़हलगंज के खोहिया पट्टी स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभय लाल यादव ने एसटीएफ से शिकायत की थी। अभय ने आशंका जताई थी कि सीतापुर में उनके नाम, पहचान व शैक्षिक प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर दो लोग नौकरी कर रहे हैं। एसटीएफ ने सीतापुर के बीएसए अजय कुमार से दोनों का ब्योरा मांगा। इनमें से एक अभय लाल यादव महमूदाबाद के पलिया कलां प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर था। दूसरा रामपुर मथुरा के गंगापुरवा प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात था।
सीतापुर में तैनात दोनो व्यक्तियों ने जौनपुर निवासी अभय लाल यादव का नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, हाईस्कूल, इंटर की मार्कशीट व प्रमाण पत्र और विद्यालय का नाम तक अपना बताया हुआ था। दोनों ने सिर्फ पते अलग-अलग दिए थे। जब दोनों फर्जी शिक्षकों को उनका पक्ष रखने के लिए बुलाया गया तो वे गायब हो गए।
बीएसए ने दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने और उनकी नियुक्ति से लेकर अब तक दिए गए वेतन की वसूली का आदेश दिया है। इस संबंध में एक चिट्ठी सीतापुर के पुलिस कप्तान और एक एसटीएफ मुख्यालय को भेज दी गई है।




