Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में इन दिनों एक ऐसी खबर चर्चा में है जो सुनकर लगता है कोई पुरानी लोककथा सच हो गई। मिर्जापुर कलां गांव में एक व्यक्ति अपने खेत पर रेस्टोरेंट बनवा रहा था। मजदूर पेड़ की जड़ उखाड़ रहे थे कि अचानक फावड़ा किसी मिट्टी के घड़े से टकराया। घड़ा निकाला तो उसमें पानी भरा था और उसके साथ अष्टधातु की बेशकीमती मूर्ति रखी मिली। मूर्ति राधा-कृष्ण की बताई जा रही है। साथ ही एक सांप की आकृति और संस्कृत में लिखा पुराना भोजपत्र भी मिला। देखते ही देखते पूरे इलाके में हल्ला मच गया। लोग दूर-दूर से दर्शन करने आने लगे।
भीड़ इतनी कि पुलिस को आना पड़ा
खबर फैली तो कुछ ही घंटों में सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। किसी ने फूल चढ़ाने शुरू कर दिए तो किसी ने अगरबत्ती जला दी। माहौल ऐसा बन गया जैसे कोई नया मंदिर खुल गया हो। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस पहुंची और मूर्ति को कब्जे में लेकर सील कर दिया। साथ ही पुरातत्व विभाग को सूचित किया गया है। अभी मूर्ति की उम्र और असली कीमत का आकलन किया जा रहा है लेकिन प्रारंभिक जांच में यह सैकड़ों साल पुरानी लग रही है।
अगर आपके खेत में भी मिल जाए ऐसा खजाना तो क्या करेंगे?
अक्सर लोग मजाक में कहते हैं कि काश हमारे खेत में भी सोना या कोई प्राचीन मूर्ति निकल आए। लेकिन सच यह है कि कानून की नजर में जमीन के नीचे दबा कोई भी खजाना आपका नहीं हो सकता। चाहे वह सोना हो चांदी हो या सदियों पुरानी मूर्ति। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 296 और 297 के तहत देश की जमीन के अंदर मौजूद हर कीमती चीज पर सिर्फ सरकार का हक होता है। इसका मतलब अगर आपको अपनी निजी जमीन में भी कुछ मिलता है तो उसे छिपाना या बेचना गैरकानूनी है। तुरंत पुलिस या जिला प्रशासन को सूचना देनी पड़ती है वरना कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
मिली हुई चीज कहां जाती है?
प्राचीन कलाकृतियां और मूर्तियां सीधे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास भेजी जाती हैं। वहां उनकी जांच होती है। असली साबित होने पर उन्हें सरकारी संग्रहालय में रखा जाता है या कभी-कभी स्थानीय म्यूजियम को दे दिया जाता है। अगर सोना-चांदी या नकदी मिलती है तो पुलिस उसे जब्त करके सरकारी खजाने में जमा करा देती है। यानी करोड़ों का माल भी मिले तो वह अंत में देश के खाते में ही जाता है। जमीन मालिक को कभी-कभी इनाम या सम्मान स्वरूप कुछ राशि मिल सकती है लेकिन पूरा खजाना उसका नहीं होता।
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