Up Kiran, Digital Desk: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में भारत को मिली शर्मनाक हार के बाद टीम के कोचिंग स्टाफ और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस हार ने भारतीय क्रिकेट को हिलाकर रख दिया है, खासकर उन खिलाड़ियों को लेकर जो बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ थे और टेस्ट क्रिकेट में जिस धैर्य की ज़रूरत होती है, वह स्पष्ट रूप से गायब था। अब इस पर गेंदबाज़ी कोच मोर्ने मोर्कल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
मोर्कल का बड़ा बयान
मोर्कल ने कहा कि टेस्ट सीरीज़ के दौरान खिलाड़ियों के चयन का जिम्मा उनके नहीं, बल्कि टीम के अन्य वरिष्ठ सदस्यों का है। उनके मुताबिक, वह चयन में कोई हस्तक्षेप नहीं करते और यह पूरी जिम्मेदारी गौतम, चयनकर्ताओं और कप्तान की है। मोर्कल ने साफ किया, "मैं इन चीजों में ज़्यादा शामिल नहीं होता, चयनकर्ता और कप्तान ही इस पर फैसला करते हैं, इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।"
भारत की टेस्ट हार का विश्लेषण
भारत को इस टेस्ट सीरीज़ में सिर्फ हार ही नहीं, बल्कि इतिहास में अपनी सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। गुवाहाटी में 408 रनों से मिली हार के बाद भारतीय क्रिकेट के लिए यह 66 सालों में पहला मौका था, जब टीम ने सात मैचों में से पाँच टेस्ट गंवाए। ऐसे में चयन समिति और टीम के रणनीतिक निर्णयों पर सवाल उठने स्वाभाविक थे।
साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे में उम्मीदें
लेकिन अब सभी की नजरें 30 नवंबर से शुरू होने वाली वनडे सीरीज़ पर हैं। मोर्कल ने कहा कि तेज गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा और हर्षित राणा को इस सीरीज़ में खुद को साबित करने का अच्छा मौका मिलेगा। उनका मानना है कि इन तीनों तेज गेंदबाज़ों के लिए यह सीरीज़ एक बेहतरीन अवसर होगी, जहां वे दक्षिण अफ्रीका जैसे मजबूत बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ अपने प्रदर्शन को उभार सकते हैं।
मोर्कल की उम्मीदें
मोर्कल ने कहा हर्षित, प्रसिद्ध और अर्शदीप के लिए यह शानदार मौका है। हमें इन खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा खेलने का मौका देना चाहिए, और यह उनके लिए एक बेहतरीन चुनौती होगी। वे एक आक्रामक टीम के खिलाफ खेलेंगे, और इस तरह की परिस्थितियों में खुद को परखने का यह बेहतरीन अवसर होगा।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चुनौती
अब टीम इंडिया की नजरें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले आगामी वनडे मैचों पर टिकी हुई हैं। 30 नवंबर से शुरू होने वाली यह सीरीज़ भारतीय खिलाड़ियों के लिए टेस्ट सीरीज़ की निराशा से बाहर निकलने का एक मौका हो सकती है।
यह सीरीज़ भारत के लिए खास मायने रखती है, क्योंकि टेस्ट सीरीज़ में मिली हार के बाद भारतीय क्रिकेट को आत्म-मूल्यांकन की आवश्यकता है। आने वाले वनडे और टी-20 मैचों में भारतीय टीम अपनी खोई हुई लय को फिर से हासिल करने की कोशिश करेगी।
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