img

UP Kiran,Digital Desk: पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद पप्पू यादव को एक 30 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में 6 फरवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, पटना सिविल कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पप्पू यादव की जमानत स्वीकार कर ली, और अब वे पटना की बेऊर जेल से रिहा हो गए हैं।

क्या है 1995 का मामला?

यह विवाद 1995 का है, जब शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने पप्पू यादव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनका मकान किराए पर लिया था। हालांकि, इस मकान में रहने के बजाय पप्पू यादव ने इसे एक दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया। इस पर विवाद बढ़ने के बाद, 1995 में पटना के शास्त्री नगर थाने में केस दर्ज कराया गया था। कई सालों तक मामले की सुनवाई नहीं होने के कारण यह मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई बन गया। अंततः अब कोर्ट से वारंट जारी होने पर पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई है।

कानूनी प्रक्रिया और कुर्की का आदेश

पिछले कुछ वर्षों में इस मामले के तहत कई बार पप्पू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ पेशी के दौरान गैरहाजिर रहने के कारण अदालत ने उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश भी दिया था। इससे पहले गिरफ्तारी वारंट और इश्तेहार भी जारी किए गए थे, लेकिन कोई असर नहीं हुआ था। अंततः अदालत की कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

पप्पू यादव का राजनीतिक आरोप

पप्पू यादव का कहना है कि यह गिरफ्तारी उनकी राजनीतिक आलोचना का परिणाम है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार और खासकर नीट परीक्षा में एक उम्मीदवार की मौत के मामले में उनकी आलोचना के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पप्पू यादव ने दावा किया है कि उनकी यह आलोचना केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे गए इस मामले की जांच पर आधारित है। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी पप्पू यादव का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी गिरफ्तारी इस कारण की गई है क्योंकि वह राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।