Up Kiran,Digital Desk: साइबर ठग अब न केवल युवाओं को, बल्कि बुजुर्गों और आम नागरिकों को भी अपनी चालाकी से निशाना बना रहे हैं। हाल ही में देहरादून में दो बड़े साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं, जिनमें एक बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा केस बताकर छह दिन तक मानसिक रूप से परेशान किया गया, जबकि एक महिला को निर्वाचन आयोग का अधिकारी बनकर ठगा गया। इन घटनाओं ने न केवल पीड़ितों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला।
बुजुर्ग से साइबर ठगी: फर्जी केस बनाकर पैसे ऐंठे गए
रायपुर निवासी सनमीत सिंह नामक एक बुजुर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि 6 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को सीबीआई के अधिकारी के रूप में पेश किया और कहा कि उनका आधार कार्ड खो गया है। इसके बाद उन्होंने बताया कि उनके आधार कार्ड से जुड़ी एक सिम कार्ड मुंबई के छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट से खरीदी गई है, जो नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी है। कॉल करने वाले ने बताया कि पीड़ित के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, और इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत भी भेजे गए।
कई दिनों तक यह ठग पीड़ित को डरा-धमका कर पैसों की मांग करते रहे। पहले तो उन्होंने तीन लाख दस हजार रुपए भेजने को कहा, ताकि परिवार को सुरक्षा मिल सके। इसके बाद पीड़ित को लगातार धमकाया गया और 12 जनवरी को उन्होंने 11 लाख 50 हजार रुपए और भेज दिए। हालांकि, उन्हें इस पैसे की कोई रसीद नहीं मिली, जिससे उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने तत्काल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत की।
साइबर ठगों द्वारा महिला को निर्वाचन आयोग का अधिकारी बनकर ठगा
साथ ही, एक और मामले में तूनवाला की साधना शर्मा नामक महिला ने भी शिकायत दर्ज कराई है। 9 जनवरी को एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और खुद को निर्वाचन आयोग का अधिकारी बताया। उस व्यक्ति ने साधना से पूछा कि वह बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के तौर पर कितने चुनावों में काम कर चुकी हैं। इसके बाद उसने साधना के मोबाइल पर एक कोड भेजा, जिसे उसने साझा कर दिया। जैसे ही कोड शेयर किया गया, महिला का मोबाइल हैक हो गया और उसके खाते से अलग-अलग किस्तों में एक लाख छह हजार रुपए उड़ा लिए गए।
साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा की आवश्यकता
इन दोनों घटनाओं से यह साफ हो गया है कि साइबर ठगों का निशाना अब आम नागरिक, विशेषकर बुजुर्ग और महिलाएँ बन रही हैं। जिनके पास साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता कम होती है, वे अधिकतर ठगों के जाल में फंस जाते हैं। इस तरह की घटनाओं में पीड़ितों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संकट भी झेलना पड़ता है।
साइबर ठगी की इन घटनाओं को देखते हुए, सरकार और पुलिस प्रशासन को लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही नागरिकों को भी यह समझना होगा कि बिना प्रमाण के किसी से पैसे या व्यक्तिगत जानकारी शेयर करना कितना खतरनाक हो सकता है।
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