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Up Kiran,Digital Desk: भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी साझेदारी ने दोनों देशों के सैन्य सामर्थ्य को एक नया मुकाम दिया है। इस विशेष सहयोग ने न केवल रक्षा क्षेत्र में प्रगति को संभव किया है, बल्कि दुनिया भर में भारत की सैन्य क्षमता की छवि को भी नए सिरे से स्थापित किया है। इस साझेदारी में रूस की अत्याधुनिक तकनीक और भारत की निर्माण तथा संचालन की क्षमता का अनूठा मिलाजुला रूप देखा जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल: बेहद तेज और प्रभावी

भारत और रूस की संयुक्त कोशिशों से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है। इस मिसाइल की रफ्तार लगभग मैक 2.8 है, जो इसे एक घातक और अप्रतिबंधित शस्त्र बनाती है। इसकी विशेषता यह है कि यह जमीन, समुद्र, आकाश और भविष्य में पनडुब्बियों से भी दागी जा सकती है, जिससे इसे अत्यधिक बहुमुखी बना दिया है।

सुखोई Su-30MKI: वायुसेना की मजबूती

भारतीय वायुसेना में सबसे प्रमुख और भरोसेमंद विमान के रूप में Su-30MKI को देखा जाता है। रूस की मदद से इसे भारतीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था। आजकल इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित किया जाता है। इस विमान की ताकत इसकी लंबी उड़ान क्षमता, भारी हथियार ले जाने की क्षमता और अत्याधुनिक एवियोनिक्स में छुपी है, जो इसे किसी भी दुश्मन से मुकाबला करने के लिए बेहद सक्षम बनाती है।

T-90 भीष्म टैंक: जमीनी सुरक्षा का स्तंभ

भारतीय सेना के लिए T-90 'भीष्म' टैंक एक अहम शक्ति का प्रतीक है। यह टैंक भारतीय सैनिकों के लिए सबसे ताकतवर हथियारों में से एक बन चुका है। रूस की सहायता से विकसित और भारत में उत्पादन किया गया यह टैंक रेगिस्तान से लेकर पहाड़ी इलाकों में भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करता है। इसकी उच्च सुरक्षा प्रणाली और ताकतवर मारक क्षमता इसे भारतीय सेना के लिए अत्यंत मूल्यवान बनाती है।

AK-203 राइफल: भारतीय सैनिकों के लिए नई ताकत

भारत और रूस ने मिलकर उत्तर प्रदेश के अमेठी में AK-203 असॉल्ट राइफल के निर्माण की एक साझेदारी की है, जो भारतीय सेना की पुरानी इंसास राइफलों को बदलने के लिए तैयार है। बेहतर रेंज और सटीक निशाना करने की क्षमता के साथ यह राइफल सैनिकों के हाथों में शक्ति का एहसास कराती है। यह राइफल भारतीय सेना के लिए एक अहम संसाधन बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करती है।

हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II: भविष्य की युद्ध तकनीक

भारत और रूस की नजरें अब ब्रह्मोस-II पर हैं, जो एक हाइपरसोनिक मिसाइल होगी। इसकी गति मैक 7 से भी अधिक हो सकती है, जो मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर कर सकती है। यह परियोजना भारतीय रक्षा के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है और भविष्य के युद्धों में भारत को एक निर्णायक बढ़त दे सकती है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग: नई रणनीतिक दिशा

भारत और रूस की रक्षा साझेदारी केवल सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के सामूहिक शक्ति और वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका को भी सशक्त बनाती है। रूस की अत्याधुनिक तकनीकी मदद और भारत की स्थानीय निर्माण क्षमता ने रक्षा क्षेत्र में एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदारी स्थापित की है, जो आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।