UP Kiran,Digital Desk: भारतीय रेलवे में यात्रियों को अक्सर भीड़-भाड़ का सामना करना पड़ता है, विशेषकर जनरल डिब्बों में। इस स्थिति में कुछ यात्री सुरक्षित जगह न मिलने के कारण लगेज कोच में चढ़ जाते हैं। हालांकि, यह कदम न केवल अवैध है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक हो सकता है।
क्यों है लगेज कोच में चढ़ना खतरनाक?
लगेज कोच को सिर्फ सामान और पार्सल ढोने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन डिब्बों में बैठने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होती और न ही यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई खास इंतजाम होते हैं। जब लोग यहां सफर करते हैं, तो न केवल अपनी बल्कि दूसरों की सुरक्षा को भी खतरे में डालते हैं।
रेलवे प्रशासन ने इन कोचों में यात्रा करने पर गंभीर दंड के प्रावधान किए हैं। यह स्पष्ट है कि किसी भी कोच का उद्देश्य उसके निर्धारित उपयोग के लिए होता है। इस नियम का उल्लंघन करने से न केवल कानूनी परेशानी होती है, बल्कि हादसों का भी खतरा बढ़ता है।
जुर्माना और सजा: क्या कहता है रेलवे एक्ट?
रेलवे एक्ट 1989 के तहत यदि कोई यात्री लगेज कोच में यात्रा करता है, तो उसे 500 से 1000 रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में यह जुर्माना और बढ़ सकता है, और यात्री को 6 महीने तक की जेल की सजा भी हो सकती है। कुछ रेल जोनों में तो जुर्माना उस कोच के एसी फर्स्ट क्लास किराए के बराबर हो सकता है। इसके अलावा, यात्री को लगेज के किराए का 6 गुना तक का शुल्क भी चुकाना पड़ सकता है।
क्या ध्यान रखें?
वही कोच चुनें – जिस कोच का टिकट आपने लिया है, उसी में यात्रा करें।
टिकट का ध्यान रखें – जनरल टिकट लेकर स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करने पर आपको अतिरिक्त किराया और जुर्माना देना पड़ सकता है।
विशेष कोचों में यात्रा – महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों, या गार्ड के कोचों में बिना अनुमति के प्रवेश करना अपराध है।
रेलवे प्रशासन ने इन नियमों को लागू करने के पीछे यात्रियों की सुरक्षा और समुचित संचालन सुनिश्चित करना है। ऐसे में हमें अपनी जिम्मेदारी समझते हुए, रेलवे के नियमों का पालन करना चाहिए ताकि हम सभी एक सुरक्षित यात्रा कर सकें।

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