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Up Kiran, Digital Desk: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी बेबाक और सख्त बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। एक बार फिर उन्होंने अपने इरादे साफ करते हुए राज्य में अवैध कब्जा करने वालों को एक कड़ा और सीधा संदेश दिया है। उन्होंने कहा, जब तक मैं असम का मुख्यमंत्री हूँ, अतिक्रमणकारी यहाँ चैन की साँस नहीं ले पाएंगे। उन्हें असम छोड़कर जाना ही होगा।

यह सिर्फ एक खोखली धमकी नहीं थी, बल्कि इसे एक ऐसे मौके पर कहा गया, जहाँ एक तरफ सरकार हज़ारों भूमिहीन परिवारों को उनकी ज़मीन का हक़ दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ अवैध कब्ज़ा करने वालों को बाहर का रास्ता दिखाने का प्रण ले रही थी।

अतिक्रमण एक बीमारी है

सोनितपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए सीएम सरमा ने अतिक्रमण की समस्या को एक बीमारी की तरह बताया। उन्होंने कहा कि यह बीमारी राज्य के 'सत्रों' (मंदिरों), जंगलों और यहाँ के मूल निवासियों की ज़मीनों को खाए जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस 'बीमारी' को जड़ से ख़त्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, जो लोग बाहर से आकर हमारी ज़मीनों पर, हमारे सत्रों और जंगलों पर अवैध कब्ज़ा करके बैठे हैं, उन्हें यह जगह ख़ाली करनी होगी। यह हमारा संकल्प है।

एक तरफ हक़ दिया, दूसरी तरफ चेतावनी

मुख्यमंत्री 'मिशन बसुंधरा' योजना के तहत 27,000 भूमिहीन मूलनिवासी परिवारों को भूमि पट्टा (ज़मीन के मालिकाना हक़ के दस्तावेज़) बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि असम के हर मूलनिवासी परिवार के पास अपनी ज़मीन हो, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को भी गिनाया और कहा कि पिछले साढ़े तीन सालों में उनकी सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अतिक्रमण हटाने का काम किया है और यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उनकी सरकार ने यह काम बिना किसी बड़ी हिंसा के शांतिपूर्ण तरीके से किया है, जबकि पहले ऐसे अभियानों में हिंसा और मौतें होती थीं।

सीएम सरमा का यह बयान साफ़ करता है कि आने वाले दिनों में असम में अवैध कब्ज़ा करने वालों के ख़िलाफ़ सरकारी कार्रवाई और भी तेज़ हो सकती है। उनका संदेश साफ़ है असम की ज़मीन, असम के लोगों के लिए है, अतिक्रमणकारियों के लिए नहीं।