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Up Kiran, Digital Desk: बिहार में अपराधियों की कमर तोड़ने का प्लान अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है। शपथ लेते ही गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कह दिया था – “या तो गुंडे अपना धंधा छोड़ दें या बिहार छोड़कर भाग जाएं।” बस फिर क्या था, पुलिस हेडक्वार्टर से लेकर जिला स्तर तक हर कोई हरकत में आ गया।

शनिवार की सुबह-सुबह पूरे राज्य की जेलों में उस समय भयानक सन्नाटे को चीरते हुए पुलिस की गाड़ियां दनदनाती हुईं अंदर घुस गईं। कई जगह तो जिलाधिकारी और एसएसपी खुद 5 बजे पहुंच गए। जेल के गेट पर तैनात कर्मचारी ये देखकर हक्के-बक्के रह गए कि इतनी सुबह इतना बड़ा अमला कैसे आ धमका!

मुजफ्फरपुर में तो हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। डीएम और एसएसपी ने ठीक 5 बजे छापा मार दिया। दो घंटे तक हर वार्ड हर कोना छान मारा गया। अच्छी बात ये रही कि कोई मोबाइल सिम कार्ड या नशीला पदार्थ नहीं मिला। लेकिन डीएम साहब को जेल की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर लगी। उन्होंने जेल अधीक्षक को फटकार लगाते हुए कहा – “जितने भी गार्ड खाली हैं उन्हें तुरंत भरें, गृहरक्षकों की टीम बुलाएं और मुलाकातियों की जांच को और सख्त करें।” साथ ही हर कैदी का पुराना क्राइम रिकॉर्ड अलग से फाइल तैयार करने का आदेश दे दिया।

इसी तरह मोतिहारी केंद्रीय कारा में भी सुबह 5 से 7:30 बजे तक धावा बोला गया। सदर एसडीओ श्वेता भारती और डीएसपी दिलीप कुमार ने करीब दो सौ पुलिसकर्मियों के साथ पूरी जेल पलट दी। पर यहां भी हाथ खाली ही रहे।

पूर्णिया पटना और सारण की जेलों में भी यही सीन देखने को मिला। छपरा में डीएम और एसएसपी ने सीसीटीवी कैमरे चेक किए, कर्मचारियों की ड्यूटी देखी और कैदियों से भी बात की। कहीं से कोई आपत्तिजनक चीज बरामद नहीं हुई।

मुंगेर में तो एक दिन पहले ही शुक्रवार रात को डीएम निखिल धनराज और एसपी सैयद इमरान मसूद ने सरप्राइज दे दिया था। रात में पुलिस बल के साथ मंडल कारा में घुसे और हर सेल खंगाला लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।

जानकारों का कहना है कि जेलों से ही बाहर गैंग चलाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी डर से नीतीश सरकार ने पूरे राज्य में एक साथ इतना बड़ा ऑपरेशन चलवाया। हालांकि इस बार कुछ नहीं मिला लेकिन मैसेज साफ है – अब जेल की ऊंची दीवारों के अंदर भी कोई सुरक्षित नहीं है।