Up Kiran, Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की तारीख नजदीक आते ही नालंदा जिले में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में चुनावी रण में उतरने वाले कई प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इस बार नालंदा जिले की सात विधानसभा सीटों पर चुनावी मुकाबला खासा दिलचस्प होने की उम्मीद है, जिसमें प्रमुख दलों के प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाएंगे।
मुख्यमंत्री के करीबी की प्रतिष्ठा दांव पर
नालंदा विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री श्रवण कुमार आठवीं बार चुनावी मैदान में हैं। उनकी स्थिति मजबूत मानी जाती है, क्योंकि वे अब तक सात बार इस क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं। महागठबंधन से कांग्रेस ने कौशलेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन श्रवण कुमार का विजयी रथ अब तक रोकने में कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है।
जदयू के श्रवण कुमार ने 1995, 2000, 2005, 2010, 2015 और 2020 में लगातार जीत हासिल की है, जबकि 2020 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार को हराया था। इस बार भी उनका मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार से ही है। कुल मिलाकर, नालंदा में 10 उम्मीदवार मैदान में हैं।
हरनौत में जदयू की पकड़
हरनौत विधानसभा क्षेत्र, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र भी है, एक अहम सीट मानी जाती है। यहां से जदयू ने पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक हरिनारायण सिंह को मैदान में उतारा है। हरिनारायण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में नौ बार विधानसभा चुनाव जीते हैं, और अगर वे इस बार भी जीतते हैं, तो बिहार विधानसभा में सबसे ज्यादा बार जीतने का रिकॉर्ड बना सकते हैं।
हरनौत सीट को जदयू का अभेद किला माना जाता है। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने लोजपा की ममता देवी को हराया था। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के अरुण कुमार से है। यहां 11 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
बिहारशरीफ में भाजपा और कांग्रेस का मुकाबला
बिहारशरीफ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के वर्तमान विधायक डॉ. सुनील कुमार का चुनावी मुकाबला कांग्रेस के उमैद खान से हो रहा है। डॉ. सुनील कुमार ने 2005 से 2020 तक हर चुनाव में जीत हासिल की है। इस बार भी वे चुनावी जंग में अपनी विजय की उम्मीद लगाए हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस का नायक उमैद खान मैदान में है, और इस बार मुकाबला और भी कड़ा हो सकता है, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास मजबूत उम्मीदवार हैं। यहां 10 उम्मीदवार हैं।
राजगीर और अस्थावां में कड़ी टक्कर
राजगीर (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में जदयू के कौशल किशोर और भाकपा माले के विश्वनाथ चौधरी के बीच मुकाबला होगा। जदयू की नजर इस सीट पर बनी हुई है, और यहां सात उम्मीदवार चुनावी दंगल में उतरे हैं।
अस्थावां में जदयू के जितेंद्र कुमार और राजद के रवि रंजन कुमार के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। जनसुराज पार्टी ने यहां नीतीश कुमार के करीबी रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह की बेटी लता सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इस क्षेत्र में कुल सात उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
इस्लामपुर और हिलसा में दिलचस्प मुकाबले
इस्लामपुर और हिलसा विधानसभा क्षेत्रों में भी चुनावी मुकाबला रोचक होगा। इस्लामपुर से राजद के राकेश कुमार रोशन और जदयू के रूहेल रंजन के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। हिलसा में जदयू के कृष्ण मुरारी शरण और राजद के अत्री मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव के बीच तगड़ी भिड़ंत हो सकती है।
नालंदा: ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम
नालंदा का इतिहास और उसकी राजनीति दोनों ही काफी समृद्ध रहे हैं। यह वही इलाका है जहां प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय हुआ करता था, जो दुनिया भर में एक शिक्षा का केन्द्र माना जाता था। इस विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या 10,000 के करीब थी और यहां 2,000 शिक्षक थे। यह क्षेत्र महाभारत से लेकर बौद्ध धर्म तक की ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है।
नालंदा के इलाके में पवित्र यज्ञ भूमि और भगवान महावीर के मोक्ष की प्राप्ति का स्थल पावापुरी जल मंदिर स्थित है। ऐतिहासिक दृष्टि से नालंदा, बिहार और भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां राजगीर और तक्षशिला विश्वविद्यालय के अवशेष भी मौजूद हैं।
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