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Up kiran,Digital Desk : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त आदेश और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसेना (CENTCOM) की भारी तैनाती के बावजूद ईरान ने दुनिया को हैरान कर दिया है। जहाँ अमेरिका ने दावा किया था कि वह एक परिंदा भी पर नहीं मारने देगा, वहीं पिछले कुछ दिनों में ईरान से जुड़े कई तेल टैंकर और मालवाहक जहाज अमेरिकी रडार को चकमा देकर खुले समंदर में निकल चुके हैं। समुद्री खुफिया विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब रूस द्वारा आजमाई गई 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) तकनीक का सहारा लेकर अमेरिका की नाकाबंदी को बेअसर कर रहा है।

नाकाबंदी धरी रह गई: 'एलपिस' और 'मुरलीकिशन' की रहस्यमयी यात्रा

अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल से होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 12 युद्धपोत और 100 से ज्यादा विमान तैनात किए थे। लेकिन ताजा रिपोर्ट बताती है कि ईरान के जहाजों ने इस घेराबंदी में सेंध लगा दी है:

टैंकर एलपिस (Elpis): कोमोरोस के झंडे वाला यह टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में है। यह ईरान के बुशेहर बंदरगाह से निकला और बिना किसी रोक-टोक के अमेरिकी युद्धपोतों के बगल से गुजर गया।

टैंकर मुरलीकिशन: मेडागास्कर के झंडे वाले इस टैंकर ने भी सफलतापूर्वक नाकाबंदी पार की। यह जहाज पहले रूसी और ईरानी तेल की ढुलाई के लिए जाना जाता रहा है।

ईरान का 'इनविजिबल' प्लान: अमेरिका को कैसे मिल रहा है धोखा?

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान से जुड़े जहाज खुद को अमेरिकी सैटेलाइट और रडार से बचाने के लिए 'घोस्ट टैक्टिक्स' (Ghost Tactics) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

AIS ट्रांसपोंडर बंद करना (Going Dark): जहाज अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद कर देते हैं। इससे वे डिजिटल मैप पर 'गायब' हो जाते हैं। अमेरिका के लिए हजारों मील के समुद्र में बिना सिग्नल वाले जहाज को ढूंढना 'भूसे के ढेर में सुई ढूंढने' जैसा है।

लोकेशन स्पूफिंग (Location Spoofing): यह सबसे आधुनिक तरीका है। जहाज के सॉफ्टवेयर में बदलाव कर गलत जीपीएस (GPS) सिग्नल भेजे जाते हैं। जहाज वास्तव में होर्मुज में होता है, लेकिन अमेरिकी रडार पर उसकी लोकेशन सैकड़ों मील दूर किसी सुरक्षित बंदरगाह या दूसरे देश के तट पर दिखाई देती है।

डिजिटल फिंगरप्रिंट और 'जॉम्बी आईडी': ईरानी टैंकर अपनी पहचान (9 अंकों वाला यूनिक आईडी) बदल लेते हैं। वे किसी ऐसे जहाज की पहचान (Digital Fingerprint) अपना लेते हैं जो या तो कबाड़ हो चुका है या जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। इसे 'जॉम्बी आईडी' कहा जाता है।

स्टेटलेस शिप (Stateless Ships): कई जहाज खुद को बिना किसी देश के रजिस्ट्रेशन वाला यानी 'स्टेटलेस' घोषित कर देते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पेचीदगियों के कारण उन पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

रूस का 'शैडो फ्लीट' फॉर्मूला

ईरान ने रूस से वह तकनीक सीखी है जो उसने यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल की थी। इसमें पुराने टैंकरों का एक ऐसा बेड़ा तैयार किया जाता है जिसका मालिकाना हक कागजों पर बेहद उलझा हुआ होता है। अमेरिका इन जहाजों को रोकने की कोशिश तो करता है, लेकिन तकनीकी 'स्पूफिंग' के कारण वे उसकी आँखों के सामने से निकल जाते हैं।

अमेरिका की बौखलाहट और तेल संकट

CENTCOM के अधिकारियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। यदि इसी तरह जहाज निकलते रहे, तो नाकाबंदी का मुख्य उद्देश्य (ईरान के तेल-गैस निर्यात को ठप करना) फेल हो जाएगा। वहीं, इस लुका-छिपी के खेल के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं।