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UP Kiran,Digital Desk: वैश्विक राजनीति में इन दिनों एक नया मोड़ आया है। अमेरिकी और रूसी रिश्तों में संभावित आर्थिक समझौते की खबरों ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। ये चर्चा विशेष रूप से तब ध्यान आकर्षित करती है जब बात की जा रही है कि रूस फिर से डॉलर आधारित वैश्विक भुगतान व्यवस्था में शामिल हो सकता है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो इसका न केवल कूटनीतिक माहौल पर असर पड़ेगा, बल्कि इससे सोने की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

सोने का आकर्षण फीका पड़ने लगा है

कुछ समय पहले तक, सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में जाना जाता था। वैश्विक अनिश्चितताओं और राजनीतिक तनाव के बीच, सोने ने अपनी कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा था। लेकिन अब हालात बदलते हुए नजर आ रहे हैं। सोने की कीमतों में गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशक अब नए वैश्विक संकेतों को ध्यान में रखते हुए निवेश निर्णय ले रहे हैं। यह बदलाव एक नई दिशा की ओर इशारा कर रहा है, जिसमें डॉलर का प्रभाव बढ़ सकता है।

रूस की SWIFT से बाहर जाने के बाद की स्थिति

वर्ष 2022 में, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद उसे SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) सिस्टम से बाहर कर दिया गया था। इस कदम के बाद, रूस ने वैकल्पिक भुगतान तंत्र विकसित किया और स्थानीय मुद्राओं के जरिए व्यापार को बढ़ावा दिया। इसी दौरान, BRICS देशों ने भी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में कई कदम उठाए। ऐसे में, यदि रूस वापस डॉलर आधारित भुगतान तंत्र में लौटता है, तो इससे वैश्विक आर्थिक संरचना में बदलाव आ सकता है और डॉलर के प्रभुत्व को और मजबूती मिल सकती है।

सोने के प्रति निवेशकों का रुझान: डॉलर के मुकाबले चुनौतियाँ

पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने डॉलर के जोखिम से बचने के लिए अपने सोने के भंडार को बढ़ाया है। लेकिन यदि डॉलर फिर से मजबूत होता है, तो यह ट्रेंड रुक सकता है। डॉलर के मजबूत होने से सोने की मांग में कमी आ सकती है, क्योंकि दोनों को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। इससे निवेशक सोने से अपने पैसे निकालकर डॉलर आधारित बॉन्ड्स या अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश कर सकते हैं।