Up Kiran,Digital Desk: अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ़ के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ प्रमुख सेक्टरों में दबाव बढ़ा है। हालांकि सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिए ठोस आर्थिक कदम उठाने की दिशा में काम कर रही है। अगले केंद्रीय बजट में ऐसे प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा हो सकती है जिससे इन क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया जा सके।
कौन से सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?
अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ़ से सबसे ज्यादा असर उन उद्योगों पर पड़ा है जो श्रम-प्रधान हैं। इनमें लेदर उत्पाद जेम्स और ज्वैलरी रेडीमेड गारमेंट्स इंजीनियरिंग गुड्स और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे क्षेत्रों का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इन उद्योगों में लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं। इसलिए निर्यात में गिरावट का सीधा असर इन कर्मचारियों की नौकरियों पर भी पड़ सकता है जिससे संकट और बढ़ सकता है।
सितम्बर से निर्यात में गिरावट
सितम्बर से ही रिपोर्ट्स में यह साफ़ होने लगा था कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग में कमी आ रही है। इसके बाद निर्यातक संगठनों ने सरकार से टैक्स में राहत वित्तीय सहायता और अन्य इंसेंटिव्स की मांग करना शुरू कर दिया था। हालांकि शुरुआत में सरकार ने इन क्षेत्रों का विश्लेषण करने के लिए कहा था ताकि अगले कदम के लिए सही निर्णय लिया जा सके।
क्या बजट से राहत मिल सकती है?
भारत सरकार अगले केंद्रीय बजट में उन क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खासकर उन उद्योगों के लिए निर्यात प्रोत्साहन ब्याज पर सब्सिडी टैक्स में राहत और उत्पादन से जुड़े वित्तीय मदद के उपायों पर विचार किया जा सकता है। इससे प्रभावित क्षेत्रों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
रोजगार संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारी
अमेरिकी बाजार में गिरते ऑर्डर्स का असर न केवल निर्यात पर बल्कि रोजगार पर भी पड़ा है। ऐसे कई निर्यातक हैं जिनका व्यवसाय पूरी तरह से अमेरिकी बाज़ार पर निर्भर है। अगर ऑर्डर्स घटते हैं तो उत्पादन में कमी करनी पड़ेगी जो कि अंततः कर्मचारियों की नौकरियों पर भी असर डाल सकती है। सरकार इस संकट से निपटने के लिए रणनीति बना रही है ताकि श्रमिकों का रोजगार बच सके और उन्हें वैश्विक व्यापार विवादों का असर न महसूस हो।
भारत सरकार यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव में आकर वह पीछे नहीं हटेगा। आगामी बजट केवल प्रभावित उद्योगों को संभालने के उपायों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दिखाएगा कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों और रोजगार योजनाओं को वैश्विक दबावों के बावजूद मजबूती से लागू करने की क्षमता रखता है।

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