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Up Kiran, Digital Desk: इन दिनों ईरान गंभीर सामाजिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। देश के प्रमुख शहरों में सरकार विरोधी आंदोलन जोर पकड़ते जा रहे हैं और इन प्रदर्शनों का असर रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। महंगाई, बेरोजगारी, और रियाल की गिरती कीमत के कारण आम जनता में बढ़ता हुआ आक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। भ्रष्टाचार के आरोपों ने इस गुस्से को और भी बढ़ा दिया है। ईरानी शासन ने इस उथल-पुथल को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को बंद कर दिया है, जिससे देश की जनता का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट चुका है।

सुरक्षा के नाम पर अधिकारों का उल्लंघन

यह कदम सुरक्षा बलों द्वारा विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई छिपाने और उन आवाजों को दबाने के लिए उठाया गया है, जो सरकार के खिलाफ उठ रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स और मैसेजिंग ऐप्स को बंद करके ईरानी सरकार ने अपनी जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश की है। मानवाधिकार संगठन मानते हैं कि यह सिर्फ एक तात्कालिक समाधान है, जबकि संकट का असली हल इस तरह के दमन से नहीं निकलेगा।

शहरों में बढ़ते हुए प्रदर्शन अब सिर्फ राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मशहद, इस्फहान, शिराज, तबरीज़ और कराज जैसे बड़े शहरों तक फैल चुके हैं। जहां एक ओर प्रदर्शनकारियों का समर्थन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों से हिंसक झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं। अधिकार संगठनों के अनुसार, दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन सरकारी आंकड़ों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

खामेनेई ने दी बड़ी चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को सख्त चेतावनी दी है और कहा कि जो लोग देश में अराजकता फैलाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों, विशेषकर अमेरिका और उसके सहयोगियों को दोषी ठहराया। खामेनेई का कहना है कि इन प्रदर्शनों के माध्यम से ईरान की स्थिरता को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया, तो अमेरिका खामोश नहीं बैठेगा। ट्रंप का कहना है कि ईरान की स्थिति बेहद नाज़ुक है और वहां के लोगों पर अत्याचार होने पर इसका गंभीर परिणाम होगा। उनका बयान इस समय मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा रहा है।