भारत सरकार हर घर में शौचालय बनाने का अभियान चला रही है। प्रशासन की कोशिश है कि हर घर में टॉयलेट हो। यह मिशन बीते काफी सालों से जोरों पर है। वहीं दूसरी ओर घरों में वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग बहुत ज्यादा हो रहा है।
विदेशी सीटों को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि वे बैठने में सहज होती हैं। मगर वैसे भी इंडियन सीट वेस्टर्न टॉयलेट से बेहतर है। आपने सही पढ़ा। पश्चिमी शौचालय आरामदायक होते हैं और आपको बीमार कर सकते हैं। दूसरी तरफ भारतीय शौचालयों में पूरे शरीर की गति शामिल होती है। वहीं, वेस्टर्न टॉयलेट से संक्रमण की आशंका ज्यादा रहती है। क्योंकि पश्चिमी आसन का यूज करते वक्त त्वचा संपर्क में आती है।
एक रिसर्च के मुताबिक, इंडियन सीट का इस्तेमाल करने वाले लोग शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय होते हैं। पैरों के तलवों से लेकर सिर तक शरीर पर दबाव महसूस होता है। मगर इसके मुकाबले पश्चिमी सीट आरामदायक है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी बीमारी को न्यौता दे सकती है।
फ्रेश होने में लगता है वक्त
भारतीय शौचालयों को फ्रेश होने में कम वक्त लगता है। ढाई से साढ़े तीन मिनट में पेट खाली हो जाता है। जबकि वेस्टर्न सीट्स में पेट साफ होने में 5 से 7 मिनट का वक्त लगता है। कई मर्तबा तो पेट ठीक से साफ भी नहीं होता है। भारतीय शौचालय में बैठने से पेट और पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है। इसलिए पेट साफ करने में कोई परेशानी नहीं होती है।




