Up Kiran, Digital Desk: एशेज 2025 के पांचवे टेस्ट मैच ने टेस्ट क्रिकेट के रोमांच और महानता को फिर से दर्शाया। इंग्लैंड के जो रूट और ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ दोनों ने शतक जड़कर यह साबित कर दिया कि टेस्ट क्रिकेट अभी भी सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की असली परीक्षा है। जबकि रूट ने 41वां शतक पूरा किया, स्मिथ ने भी एक दिन बाद अपनी 37वीं सेंचुरी के साथ रूट की बराबरी करने की कोशिश की। इन दोनों ने आधुनिक क्रिकेट में टेस्ट के महत्व को फिर से उजागर किया, और साथ ही क्रिकेट की लम्बी और स्थिर पारियों के महत्व को भी सिद्ध किया।
जो रूट का 41वां शतक: टेस्ट क्रिकेट का नया मापदंड
जो रूट ने एशेज के पांचवे टेस्ट मैच के पहले दिन 41वां टेस्ट शतक पूरा किया। यह उपलब्धि किसी भी बल्लेबाज के लिए ऐतिहासिक मानी जाती है। रूट अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं, और उनकी नजरें अब सचिन तेंदुलकर और जैक्स कैलिस पर हैं। रूट की बल्लेबाजी तकनीक और निरंतरता ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रमुख टेस्ट बल्लेबाजों में से एक बना दिया है।
स्टीव स्मिथ का शानदार जवाब
रूट के शतक के अगले दिन, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ ने भी शानदार प्रदर्शन किया और अपना 37वां टेस्ट शतक पूरा किया। एशेज में यह उनका 13वां शतक था, और अब वह डॉन ब्रैडमैन के बाद इस सीरीज में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। स्मिथ की यह पारी फिर से यह साबित करती है कि वह टेस्ट क्रिकेट में एक असाधारण बल्लेबाज हैं। उनकी बल्लेबाजी ने उनके करियर की निरंतरता और फिटनेस को स्पष्ट रूप से दिखाया है।
विराट कोहली की अनुपस्थिति: क्या टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान अधूरा रह गया?
इन दोनों के प्रदर्शन के बीच, भारतीय क्रिकेट जगत के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने विराट कोहली की टेस्ट क्रिकेट से अनुपस्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रूट, स्मिथ और केन विलियमसन जैसे बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में अपनी निरंतरता को साबित कर रहे हैं, तो विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना एक बड़ा कदम था। मांजरेकर का मानना है कि कोहली के करियर के पिछले कुछ वर्षों में उनकी टेस्ट बल्लेबाजी में गिरावट आई थी, लेकिन इस पर कोई ठोस विश्लेषण नहीं हुआ।
कोहली का फॉर्म और संन्यास: क्या यह निर्णय सही था?
2020 से पहले विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट के ‘फैब फोर’ का एक अहम हिस्सा माना जाता था। लेकिन महामारी के बाद उनका फॉर्म गिरने लगा, खासकर ऑफ स्टंप के बाहर गेंदों के खिलाफ उनकी कमजोरी उजागर हुई। मई 2025 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया, जबकि उनका करियर औसत 46.85 था। यह बदलाव कई क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों के लिए चौंकाने वाला था।
संजय मांजरेकर की आपत्ति: क्या कोहली को टेस्ट क्रिकेट छोड़ना चाहिए था?
संजय मांजरेकर ने यह भी कहा कि कोहली का टेस्ट क्रिकेट छोड़कर वनडे क्रिकेट में खेलना अधिक निराशाजनक था। उनके अनुसार, टेस्ट क्रिकेट ही वह फॉर्मेट है जो बल्लेबाज को असली परखता है। मांजरेकर का मानना है कि कोहली को अपनी फिटनेस और तकनीकी मजबूती के बल पर फर्स्ट क्लास क्रिकेट से वापसी करने का एक और मौका मिल सकता था, जैसे केन विलियमसन ने किया।
केन विलियमसन की मिसाल: ब्रेक के बाद टेस्ट में वापसी
मांजरेकर ने केन विलियमसन का उदाहरण देते हुए यह दिखाया कि लंबे ब्रेक के बाद भी टेस्ट क्रिकेट में वापसी संभव है। विलियमसन ने एक साल तक टेस्ट क्रिकेट से दूर रहने के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी टीम में वापसी की। उन्होंने इस दौरान घरेलू क्रिकेट में खेलकर खुद को फिट किया, जो साबित करता है कि यदि खिलाड़ी प्रतिबद्ध हो, तो वह अपने प्रदर्शन को फिर से ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

_2030603673_100x75.png)
_486761727_100x75.png)
_1831337019_100x75.png)
_201949505_100x75.png)