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Up kiran,Digital Desk : अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों के बाद राजनीतिक उथल-पुथल ने हाईकोर्ट की चिंता बढ़ा दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पाला बदलने वाले नेताओं को लेकर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि इस तरह के कदम नगर निकायों में स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं। अदालत ने ठाणे कलेक्टर के आदेशों को फिलहाल रोक दिया है और सभी पक्षों को सुनने के बाद नया फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

क्या है मामला?

20 दिसंबर 2025 को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए) बनाई। इसमें एनसीपी के अजित पवार गुट भी शामिल थे। यह गठबंधन सत्ता में आया, जबकि सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना बाहर रह गई।

सीटों का गणित

शिवसेना – 27 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)

भाजपा – 14 सीटें

कांग्रेस – 12 सीटें

एनसीपी – 4 सीटें

निर्दलीय – 2 सीटें

चुनाव के बाद भाजपा ने परिषद अध्यक्ष पद जीत लिया। 7 जनवरी को कलेक्टर ने एवीए को प्री-पोल अलायंस के रूप में मान्यता दी।

पाला बदलने से बढ़ी राजनीतिक हलचल

कांग्रेस ने अपने 12 सदस्य निलंबित कर भाजपा में शामिल कर दिए।

एनसीपी के चार सदस्य शिवसेना के साथ चले गए।

9 जनवरी को कलेक्टर ने इस नए गठबंधन को प्री-पोल अलायंस मानते हुए एवीए की मान्यता रद्द कर दी।

इसके बाद एवीए ने आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे ने कहा,
"ये चार सदस्य कल किसी के साथ थे, आज किसी और के साथ हैं। यह ग्लोब-ट्रॉटिंग जैसा है। अगर कल फिर कोई और पक्ष चुन लिया जाए तो व्यवस्था कैसे चलेगी?"

कोर्ट ने 7 और 9 जनवरी वाले आदेशों को फिलहाल स्थगित रखा और कहा कि सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए।