Up kiran,Digital Desk : अगर आप अपनी पसंदीदा राजनीतिक पार्टी को चंदा देकर टैक्स में छूट पाते रहे हैं, तो अब आपको अपनी फाइलिंग के दौरान काफी सतर्क रहने की जरूरत है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स में बड़े बदलाव किए हैं। अब राजनीतिक चंदे (Political Donation) के नाम पर फर्जी तरीके से टैक्स छूट लेना नामुमकिन हो जाएगा। नए नियमों के तहत अब सरकार आपसे डोनेशन की एक-एक बारीकी मांगेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत दावों पर लगाम लगेगी।
सेक्शन 80GGC: अब सिर्फ अमाउंट बताने से नहीं चलेगा काम
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80GGC के तहत कोई भी व्यक्ति किसी रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी को दिए गए चंदे पर 100% टैक्स छूट क्लेम कर सकता है। पहले के फॉर्म्स में सिर्फ डोनेशन की राशि और तारीख भरनी होती थी, लेकिन अब नए ITR फॉर्म में आपको निम्नलिखित जानकारियां देना अनिवार्य होगा:
पार्टी का नाम: किस राजनीतिक दल को चंदा दिया गया है।
पार्टी का PAN: संबंधित पार्टी का स्थायी खाता संख्या (PAN) देना होगा।
ट्रांजैक्शन डिटेल: चंदा देने के लिए इस्तेमाल किया गया माध्यम (UPI रेफरेंस नंबर, चेक नंबर या NEFT/RTGS ट्रांजैक्शन आईडी)।
बैंक विवरण: जिस बैंक से पैसा गया है उसका IFSC कोड भी बताना होगा।
फर्जी दावों और 'कैश' डोनेशन पर कड़ा प्रहार
अक्सर देखा गया है कि टैक्स बचाने के लिए लोग फर्जी संस्थाओं या पार्टियों के नाम पर चंदा दिखा देते थे। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य डेटा-बेस्ड कंप्लायंस को बढ़ावा देना है। सरकार अब हर ट्रांजैक्शन को ट्रैक करेगी। ध्यान रहे कि राजनीतिक चंदे पर टैक्स छूट का लाभ तभी मिलता है जब भुगतान कैश (नकद) में न किया गया हो। अगर आपने ₹2,000 से ज्यादा का चंदा दिया है और वह बैंकिंग चैनल के जरिए नहीं है, तो आपको कोई छूट नहीं मिलेगी।
सिर्फ 'ओल्ड टैक्स रिजीम' में ही मिलेगा फायदा
एक अहम बात जो टैक्सपेयर्स को ध्यान में रखनी चाहिए वह यह है कि सेक्शन 80GGC के तहत मिलने वाली यह छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने वालों के लिए ही उपलब्ध है। जो टैक्सपेयर्स 'न्यू टैक्स रिजीम' (New Tax Regime) का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें राजनीतिक चंदे पर किसी भी प्रकार की टैक्स कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।
सेक्शन 80G के नियमों में भी सख्ती
राजनीतिक चंदे के साथ-साथ सामाजिक या धार्मिक संस्थाओं को दिए जाने वाले दान (Section 80G) पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब चैरिटेबल संस्थाओं को दिए गए डोनेशन के मामले में भी संस्था का नाम, PAN और पूरा पता देना अनिवार्य होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन बदलावों से ईमानदार टैक्सपेयर्स को तो कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जो लोग टैक्स चोरी के लिए डोनेशन का सहारा लेते थे, उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।




