Up Kiran, Digital Desk: हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके निवास से गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क भेजने की कार्रवाई की। इसे सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह वैश्विक अंतर-राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती की तरह देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर मादक पदार्थों और आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद से इस मामले पर दुनिया भर से विभिन्न प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, जिनमें कई देशों ने इसे उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा है।
अमेरिकी हस्तक्षेप का इतिहास और वेनेजुएला की स्थिति
अमेरिका के लातिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों में हस्तक्षेप का एक लंबा इतिहास रहा है। कभी वह सत्ता परिवर्तन के लिए तो कभी किसी नेता को अस्वीकार करने के लिए सैन्य कार्रवाई करता रहा है। लेकिन वेनेजुएला का मामला इससे कहीं अधिक जटिल और संवेदनशील है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अमेरिकी कार्रवाई में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं दिखता और यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
इतिहास में अमेरिकी दखल
दुनिया की राजनीति में अमेरिका के हस्तक्षेप के कई उदाहरण रहे हैं, जैसे 1953 में ब्रिटिश गुयाना में ब्रिटेन ने चुनी हुई सरकार को गिराया, 1965 में डोमिनिकन गणराज्य में 22,000 अमेरिकी सैनिक भेजे गए, और 1983 में ग्रेनाडा पर हमला किया गया। पनामा, हैती और अन्य देशों में भी अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप किए, लेकिन वेनेजुएला का मामला इन सभी से अलग है। यह एक बड़ा देश है, जिसकी करीब तीन करोड़ की आबादी है और एक मजबूत सशस्त्र बल है, जो इस संघर्ष को और भी गंभीर बना देता है।
यह कदम अमेरिकी सहयोगियों से भी आलोचना का शिकार हुआ है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इसे लातिन अमेरिका की संप्रभुता पर हमला करार दिया, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने कहा कि अमेरिका ने "अस्वीकार्य सीमा" पार की है। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। यहां तक कि फ्रांस के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस कार्रवाई को खतरनाक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के अनुसार, किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग प्रतिबंधित है। यह वैश्विक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
वैश्विक सुरक्षा पर असर
इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। कोलंबिया ने अपनी सीमा पर सेना तैनात कर दी है और गुयाना ने भी सुरक्षा के उपायों को बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन तब तक जारी रहेगा, जब तक वहां सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता।
इस बीच, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने इसे "आपराधिक आक्रमण" करार दिया और इसके खिलाफ प्रतिरोध जारी रखने की बात कही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई देश बिना कानूनी अनुमति के दूसरे देश के राष्ट्रपति को उठा सकता है, तो इस तरह के हस्तक्षेप से वैश्विक सुरक्षा और व्यवस्था को बड़ा खतरा हो सकता है।
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