
Up Kiran, Digital Desk: हैदराबाद में एक अत्यंत भावनात्मक कार्यक्रम (heartfelt event) के दौरान, प्रसिद्ध लेखक और नेतृत्व कोच (leadership coach) कुरुवा वेंकटरमन मूर्ति (Kuruva Venkataramana Murthy) ने अपनी बहुप्रतीक्षित नई पुस्तक 'एआई-संचालित नेतृत्व: एआई के युग में धर्म के साथ नेतृत्व' (AI-Driven Leadership: Leading with Dharma in the Age of AI) का विमोचन किया। इस पुस्तक का लॉन्च पाठकों की माताओं (mothers of his readers) की गरिमा में संपन्न हुआ, जिसने नैतिक नेतृत्व (ethical leadership) को पोषित करने के महत्व पर एक विशेष ज़ोर दिया।
'AAA मॉडल' और 'धार्मिक पंचशील': AI की चुनौतियों का सामना
मूर्ति ने पुस्तक के लॉन्च के अवसर पर अपने 'AAA मॉडल'—अनुकूलन (Adapt), प्रवर्धन (Amplify), त्वरण (Accelerate) — का परिचय दिया, जो नेताओं को तेजी से बदलते एआई (AI) परिदृश्य में अपने कौशल को बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करता है। इसके साथ ही, उन्होंने 'धार्मिक पंचशील' (Dharmic Panchsheel) नामक एक अभिनव रूपरेखा (framework) भी प्रस्तुत की, जो नेताओं को डिजिटल युग (digital age) की जटिलताओं और चुनौतियों से गुजरते हुए विवेक-आधारित (conscience-led) निर्णय लेने में मार्गदर्शन करेगी।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम
यह पुस्तक नेताओं (leaders), प्रौद्योगिकीविदों (technologists), और परिवर्तनकारी (changemakers) व्यक्तियों के लिए डिज़ाइन की गई है, जो एआई (AI) द्वारा संचालित दुनिया में अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया को सहानुभूति (empathy) और विवेक (reflection) के साथ जोड़ना चाहते हैं। यह प्राचीन ज्ञान (ancient wisdom) और आधुनिक निर्णय लेने (modern decision-making) के बीच एक सेतु का काम करती है, जिसमें सहानुभूति लूप्स (empathy loops) और चिंतन अनुष्ठान (reflection rituals) जैसे उपयोगी उपकरण शामिल हैं।
"यह सिर्फ एक किताब नहीं, एक नेतृत्व जागृति है!"
टरमन मूर्ति ने इस पुस्तक को मात्र शब्दों का संग्रह मानने के बजाय "एक नेतृत्व जागृति" (a leadership awakening) करार दिया। उनका मानना है कि वर्तमान डिजिटल युग में, जहाँ एआई (AI) तेजी से प्रगति कर रहा है, नेताओं के लिए न केवल तकनीकी ज्ञान (technical knowledge) होना महत्वपूर्ण है, बल्कि नैतिकता (ethics) और अंतरात्मा (conscience) की आवाज़ के साथ नेतृत्व करना भी अनिवार्य है। पुस्तक इस बात पर जोर देती है कि तकनीक का उपयोग सचेत विकास (conscience-led growth) के लिए होना चाहिए, न कि केवल प्रगति के लिए।
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