Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जिस युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान पाकिस्तान ने बड़े ताम-झाम के साथ किया था, वह पहले ही दिन लहूलुहान नजर आ रहा है। इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में भीषण बमबारी की है, जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस खून-खराबे ने सीजफायर की शर्तों को लेकर एक बड़ा वैश्विक 'कन्फ्यूजन' पैदा कर दिया है— पाकिस्तान इसे 'सर्वव्यापी' बता रहा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि लेबनान इसका हिस्सा ही नहीं है।
बेरूत में कत्लेआम: 254 मौतें, 1000 से ज्यादा घायल
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को जब दुनिया सीजफायर की खबरें पढ़ रही थी, उसी समय इजरायली लड़ाकू विमानों ने मध्य बेरूत के आवासीय और व्यावसायिक इलाकों को निशाना बनाया।
तबाही का मंजर: घनी आबादी वाले इलाकों पर हुए इन हमलों में 254 लोगों की जान चली गई और 1,165 लोग घायल हुए हैं।
इजरायल का रुख: इजरायल का स्पष्ट मानना है कि ईरान के साथ उसका 'अघोषित' युद्धविराम लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ उसकी कार्रवाई को नहीं रोकता।
ईरान का अल्टीमेटम: "तेल अवीव पर करेंगे मिसाइल हमला"
लेबनान में हुए इस नरसंहार के बाद ईरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इजरायल को सीधी चेतावनी दी है:
"अगर अगले कुछ घंटों में दक्षिण लेबनान में फायरिंग नहीं रुकी, तो हमारी मिसाइल यूनिट सीधे तेल अवीव को निशाना बनाएगी।"
ईरान ने इस हमले के विरोध में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है।
दावों में विरोधाभास: कौन सच बोल रहा है?
| पक्ष | सीजफायर पर दावा |
|---|---|
| पाकिस्तान (शहबाज शरीफ) | लेबनान और 'अन्य सभी जगह' तुरंत युद्धविराम के लिए सहमत हैं। यह अभी से प्रभावी है। |
| अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप) | लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। यह एक अलग झड़प है और सब इसे जानते हैं। |
| अमेरिका (जेडी वेंस) | ईरानियों को गलतफहमी हुई है। समझौता सिर्फ ईरान और अमेरिका के सहयोगियों के बीच है। |
| ईरान | लेबनान में शांति इस समझौते की प्राथमिक शर्त थी। |
पाकिस्तान की कूटनीतिक फजीहत
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सई शेख ने जोर देकर कहा था कि 'फ्रेमवर्क' में लेबनान शामिल है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप और जेडी वेंस के बयानों ने पाकिस्तान के दावों की हवा निकाल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने क्रेडिट लेने की जल्दी में समझौते की शर्तों को ठीक से समझे बिना ही घोषणा कर दी, जिससे अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख गिर रही है।




