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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका के साथ भारत के बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते के एलान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इसका असर भारत-रूस संबंधों पर पड़ेगा। हालांकि विदेश मंत्रालय के सूत्रों और रणनीतिक मामलों के जानकारों का साफ कहना है कि अमेरिका के साथ भारत का रिश्ता पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और इससे रूस के साथ दशकों पुराने संबंध प्रभावित नहीं होंगे।

ट्रंप का एलान, टैरिफ घटाकर 18 फीसदी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के कुछ ही देर बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की। ट्रंप ने कहा कि भारत पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही ट्रंप के बयान कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा, ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का स्पष्ट संदेश

पश्चिमी देशों में इस समझौते को भारत-रूस संबंधों से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत और रूस एक-दूसरे के परखे हुए और भरोसेमंद साझीदार हैं। दोनों देशों के रिश्ते द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक हितों पर आधारित हैं, जिन्हें किसी एक व्यापार समझौते से नहीं आंका जा सकता।

पूर्व राजनयिकों की राय

मास्को में भारत के पूर्व राजदूत रहे एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत का संबंध विशुद्ध रूप से राष्ट्रीय हितों के आधार पर है। वहीं रूस के साथ साझेदारी ऐतिहासिक, रणनीतिक और बहुआयामी है, जो किसी दबाव में बदलने वाली नहीं है।

रक्षा और ऊर्जा में रूस की अहम भूमिका

विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार और वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि भारत की रक्षा जरूरतों में रूस की भूमिका आज भी बेहद अहम है। आधुनिक रक्षा तकनीक और सैन्य उपकरणों के मामले में भारत की रूस पर निर्भरता बनी हुई है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के कठिन समय में भारत का साथ देना इन रिश्तों की गहराई को दिखाता है।

ब्रिक्स और एससीओ पर भी कायम रहेगा भारत

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी देशों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है। ट्रंप चाहे ब्रिक्स को लेकर कोई भी टिप्पणी करें, लेकिन भारत रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ इस मंच पर सक्रिय बना रहेगा। इसके साथ ही भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भी अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का भरोसा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि इससे भारत के लिए उच्च तकनीक, निवेश और समृद्धि के नए अवसर खुलेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि समझौते का पूरा स्वरूप सामने आने के बाद इसके दूरगामी लाभ और स्पष्ट होंगे।