UP Kiran Digital Desk : भारत में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) फरवरी में बढ़कर 3.21% हो गई, जबकि जनवरी में यह 2.74% थी। यह आंकड़ा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI – Consumer Price Index) के आधार पर मापा जाता है और इसे जारी करने वाली संस्था है National Statistical Office
1. खुदरा महंगाई क्या होती है?
खुदरा महंगाई (Retail Inflation) वह दर है जिस पर आम उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं।
इसे CPI (Consumer Price Index) से मापा जाता है, जिसमें मुख्यतः ये श्रेणियां शामिल होती हैं:
खाद्य पदार्थ (Food)
ईंधन और बिजली (Fuel & Light)
आवास (Housing)
कपड़े व जूते (Clothing & Footwear)
स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि सेवाएं
भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य तय करने की जिम्मेदारी Reserve Bank of India की होती है, जिसका लक्ष्य 4% (±2%) है।
2. फरवरी में महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण
फरवरी में महंगाई बढ़कर 3.21% होने के पीछे मुख्य कारण:
(1) खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि
सब्जियों, फलों और कुछ अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी
खाद्य पदार्थ CPI बास्केट का बड़ा हिस्सा होते हैं, इसलिए इनका प्रभाव अधिक होता है।
(2) कुछ सेवाओं की लागत में वृद्धि
परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं के खर्च बढ़े।
(3) बेस इफेक्ट
पिछले साल के आधार (base effect) के कारण भी सालाना महंगाई दर ऊपर दिखाई देती है।
3. जनवरी से तुलना
| महीना | खुदरा महंगाई |
|---|---|
| जनवरी 2026 | 2.74% |
| फरवरी 2026 | 3.21% |
यानी लगभग 0.47 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई।
4. CPI की नई सीरीज का प्रभाव
भारत ने हाल ही में CPI की नई श्रृंखला (Base Year 2024) लागू की है।
इसमें:
वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़ाकर 308 कर दी गई।
सेवाओं की संख्या 40 से बढ़ाकर 50 कर दी गई।
डिजिटल सेवाएं, किराया, ईंधन आदि नए खर्च शामिल किए गए।
इससे महंगाई का मापन अधिक वास्तविक बनाने की कोशिश की गई है।
5. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सकारात्मक पक्ष
3.21% अभी भी RBI के 4% लक्ष्य से कम है।
इसका मतलब महंगाई नियंत्रण में है।
संभावित प्रभाव
ब्याज दरों में तुरंत वृद्धि की संभावना कम
आर्थिक विकास को समर्थन मिल सकता है।




