Up kiran,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव को शांत कराने की पाकिस्तान की कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित हुई हैं। शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता के बावजूद दोनों पक्ष दोबारा बातचीत की मेज पर नहीं आ सके हैं। इस बीच, कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर है कि पाकिस्तान ने अब इस उलझन को सुलझाने के लिए चीन (China) का दरवाजा खटखटाया है।
मध्यस्थता में क्यों फेल हुआ पाकिस्तान?
इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत और दो हफ्ते के सीजफायर के बाद उम्मीद जगी थी, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान और अमेरिका के बीच जहाजों पर हमलों और जुबानी जंग ने तनाव को और बढ़ा दिया है।
दोहरा खेल: ईरान का मानना है कि पाकिस्तान 'डबल गेम' खेल रहा है। ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया है कि जनरल मुनीर का झुकाव अमेरिका की ओर अधिक है और वे केवल मध्यस्थता का नाटक कर रहे हैं।
भरोसे की कमी: तेहरान का आरोप है कि पाकिस्तान ने ईरान के मूल प्रस्तावों को दरकिनार कर दिया है और अमेरिका की ओर से 15-16 नई शर्तें ईरान पर थोपने की कोशिश की है।
अब 'छह-सूत्रीय फ्रेमवर्क' और चीन की एंट्री
अपनी साख बचाने और युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान अब चीन को इस प्रक्रिया में शामिल कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, चीन की सलाह से एक छह-सूत्रीय फ्रेमवर्क (6-Point Framework) तैयार किया गया है।
इस नए फ्रेमवर्क के मुख्य बिंदु:
परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट शर्तें।
सुरक्षा गारंटी: ईरान की मुख्य मांग—अमेरिका से ठोस सुरक्षा गारंटी।
तय रोडमैप: भविष्य की वार्ताओं के लिए एक निश्चित समय सीमा और ढांचा।
आर्थिक सहयोग: समझौते को केवल सुरक्षा तक सीमित न रखकर व्यापारिक रिश्तों की ओर ले जाना।
चीन की भागीदारी: ईरान को भरोसे में लेने के लिए बीजिंग की सक्रिय भूमिका।
ठोस गारंटी: बातचीत फिर से शुरू करने के लिए विश्वसनीय वैश्विक शक्तियों की जमानत।
चीन के लिए क्यों जरूरी है यह समझौता?
चीन इस मध्यस्थता में केवल कूटनीति के लिए नहीं, बल्कि अपने आर्थिक हितों के लिए शामिल हो रहा है:
ऊर्जा सुरक्षा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी से चीन की तेल और गैस सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
क्षेत्रीय स्थिरता: ईरान के साथ चीन के करीबी संबंध हैं, और वह इस क्षेत्र में अमेरिका के बढ़ते सैन्य प्रभाव को संतुलित करना चाहता है।
[Image showing the diplomatic triangle between Pakistan, China, and Iran]
ट्रंप का रुख और मुनीर की मुश्किलें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है, लेकिन उनकी धमकियां जारी हैं। हाल ही में ट्रंप और मुनीर के बीच फोन पर हुई बातचीत में भी होर्मुज के मुद्दे पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था। अब देखना यह होगा कि चीन की एंट्री के बाद क्या तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जमी बर्फ पिघलती है या नहीं।




