Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीरभूम और पश्चिम बर्धमान में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला। शाह ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी को 'टाटा-बाय-बाय' कहने का मन बना लिया है और 5 मई 2026 को राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार का शपथ ग्रहण होगा।
'उल्टा लटकाकर सीधा करेंगे सिंडिकेट वालों को'
अमित शाह ने बंगाल में प्रचलित 'कटमनी' और 'सिंडिकेट राज' का मुद्दा उठाते हुए ममता सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि गरीब जनता ईंट-सीमेंट खरीदने जाती है तो उनसे भी पैसे वसूले जाते हैं। शाह ने चेतावनी दी, "एक बार भाजपा की सरकार बनने दीजिए, कटमनी खाने वालों और सिंडिकेट चलाने वालों को उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम हमारी सरकार करेगी।" उन्होंने जनता से अपील की कि वे निडर होकर 'कमल' का बटन दबाएं, गुंडों से निपटने की जिम्मेदारी भाजपा की है।
घुसपैठ और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा वादा
अमित शाह ने चुनाव को 'घुसपैठियों को बाहर निकालने का जरिया' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी वोट बैंक की राजनीति के कारण बीएसएफ को बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं दे रही हैं।
बाड़ का निर्माण: भाजपा सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू होगा।
UCC लागू करना: शाह ने एलान किया कि सत्ता में आते ही बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी।
महिला सुरक्षा: गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा के शासन में ऐसा बंगाल बनेगा जहां रात 1 बजे भी बेटियां स्कूटी पर सुरक्षित निकल सकेंगी। उन्होंने आरजी कर और संदेशखाली जैसी घटनाओं को बंगाल के माथे पर कलंक बताया।
'4 मई के बाद गुंडे होंगे जेल के भीतर'
टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सख्त चेतावनी देते हुए शाह ने कहा कि 23 अप्रैल को मतदान के दिन वे अपने घरों में बंद रहें। उन्होंने कहा, "23 अप्रैल को आपका बाल भी बांका नहीं होगा क्योंकि चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। लेकिन 5 मई के बाद एक-एक गुंडे को चुन-चुनकर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कोई 'धरती पुत्र' ही बनेगा, दिल्ली से शासन नहीं चलेगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
शाह की रैलियों के बीच आज सुप्रीम कोर्ट में भी एक अहम सुनवाई होनी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच यह तय करेगी कि क्या उन 27 लाख लोगों को वोट डालने का अधिकार मिलेगा जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। यह फैसला 23 और 29 अप्रैल को होने वाले आगामी चरणों के मतदान के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।




