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मुंबई — गुरुवार और शुक्रवार की ट्रेडिंग में भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स गुरुवार को लगभग 346 अंक गिरा और शुक्रवार को इसका नुकसान ₹690 अंक के करीब रहा, जिससे यह 82,500 के निचले स्तर पर पहुँच गया ।

???? प्रमुख कारण

1. आईटी शेयरों का दबाव


TCS के कमजोर तिमाही आय आंकड़ों और आगामी क्‍वार्टर रिपोर्ट के चलते IT स्टॉक्स बड़े स्तर पर बिके। तकनीकी क्षेत्र के मुख्य शेयर इस गिरावट में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं  ।


2. वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर मजबूत


अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के आसन्न जोखिम, और बढ़ते अमेरिकी बांड यील्ड ने निवेशकों की बेचैनी और विदेशी पूंजी निकासी को तेज किया  ।


3. प्रॉफिट-बुकिंग


पिछले दिनों 8% तक की वृद्धि के बाद, निवेशकों ने अपनी कमाई सुरक्षित करने के लिए हिस्से बेचे, जिसके चलते बाजार में समग्र कमजोरी आई  ।


4. **विदेशी निवेशकों की निकासी (FII Selling)**


फोरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने लगातार बिकवाली जारी रखी, जिससे बाजार पर और दबाव आया और रुपया 5 पैसे गिरकर ₹86.76 प्रति डॉलर तक पहुंच गया  ।


5. क्रूड ऑयल और रंडी टिप्नोतिक उतार-चढ़ाव


तेल की कीमतों में अस्थिरता और रूस–यूक्रेन के बीच जारी तनाव से घरेलू मुद्रास्फीति बढ़ने का डर बना, जिससे आईटी, ऑटो और मेटल जैसे भारी सैक्टर्स में गिरावट देखी गयी।

 

 विश्लेषकों की राय

विश्लेषक मानते हैं कि यह भीषण गिरावट एक "कूल डाउन" जैसी है और बड़े निवेशक इसे मौका मान सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि तब तक सावधानी आवश्यक है जब तक वैश्विक तनाव और अमेरिका की नीतियां स्पष्ट नहीं होतीं  ।

आगे का मार्ग

सपोर्ट लेवल: Nifty का अगला मजबूत समर्थन ₹22,100–22,500 के बीच है  ।

फोकस के क्षेत्र: बैंकों के साथ-साथ IT शेयरों में भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है  ।