Up Kiran, Digital Desk: क्रिकेट के इतिहास में कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमेशा के लिए याद रह जाते हैं। 2000 में, जब भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ आखिरी वनडे मैच खेल रही थी, तब अजीत अगरकर ने अपनी बल्लेबाजी से सभी को चौंका दिया था। यह घटना न केवल भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक नई उम्मीद और आस्था भी पैदा की थी।
अगरकर का तूफान: 21 गेंदों में अर्धशतक
राजकोट के उस मुकाबले में भारत की स्थिति खास अच्छी नहीं थी। टीम के प्रमुख बल्लेबाज जल्दी पवेलियन लौट चुके थे और भारत का स्कोर 44वें ओवर में 6 विकेट पर 216 रन था। इस समय अजीत अगरकर ने आठवें नंबर पर बैटिंग के लिए कदम रखा। उन दिनों टीम में अगरकर को उनके तेज गेंदबाजी के लिए जाना जाता था, लेकिन उन्होंने अपनी बैटिंग से नया मुकाम हासिल किया। उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और कपिल देव के 17 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा। कपिल देव ने 1983 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 22 गेंदों में अर्धशतक बनाया था, लेकिन अगरकर ने उनसे एक गेंद कम में यह कारनामा कर दिखाया।
टी20 क्रिकेट से भी तेज अंदाज में बल्लेबाजी
अजीत अगरकर की बैटिंग को देखकर ऐसा लगा मानो वह किसी टी20 मैच में खेल रहे हों। उन्होंने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर पूरी तरह से हावी होते हुए 7 चौके और 4 छक्के लगाए। उनकी 25 गेंदों पर खेली गई 67 रन की नाबाद पारी ने भारत को 301 रनों तक पहुंचाया, जो उस समय एक बड़ा स्कोर था।
ऑलराउंड प्रदर्शन: बल्ले से गेंद तक
अगरकर ने सिर्फ बैटिंग ही नहीं की, बल्कि गेंदबाजी में भी अपनी चमक दिखलाई। उन्होंने जिम्बाब्वे के 3 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए और मैच में भारत को 39 रनों से जीत दिलवाई। उनके इस शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। यह पारी ना केवल उनके बल्ले से आया एक तूफान था, बल्कि यह साबित कर दिया कि अगरकर एक साधारण तेज गेंदबाज से कहीं अधिक हैं, वे एक मैच विजनर थे।
आज भी कायम है अगरकर का रिकॉर्ड
2000 के बाद से कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपनी तेज अर्धशतक पारियां खेली, जिनमें राहुल द्रविड़, युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, इन सभी ने 22 गेंदों में अर्धशतक बनाया, जबकि अजीत अगरकर का 21 गेंदों में अर्धशतक का रिकॉर्ड आज भी जस का तस कायम है। यह न केवल क्रिकेट के प्रति उनकी समझ और कौशल को दिखाता है, बल्कि उनके नाम को हमेशा के लिए भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दर्ज करता है।




