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Up Kiran, Digital Desk: बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज के वक्त थिएटर में धूम मचाने से चूक जाती हैं लेकिन सालों बाद भी लोगों की जुबान पर चढ़ी रहती हैं। आज हम बात कर रहे हैं ऐसी ही एक फिल्म की जो बॉक्स ऑफिस पर औसत रही मगर राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर गई। मुख्य भूमिका में थे अजय देवगन और उनके साथ लीड में नजर आईं ग्रेसी सिंह। नाम सुनते ही दिमाग में घंटी बजी ना? नहीं बजी तो कोई बात नहीं, हम बताते हैं।

फिल्म का नाम है – गंगाजल

साल 2003 में रिलीज हुई प्रकाश झा की यह फिल्म बिहार के उस काले दौर को पर्दे पर लाई जब पुलिस खुद अपराधी बन चुकी थी। कहानी 1980 के भागलपुर अंधा करो कांड से प्रेरित थी। उस वक्त बिहार के भागलपुर जिले में पुलिस ने दर्जनों लोगों की आंखों में तेजाब डालकर उन्हें हमेशा के लिए अंधा कर दिया था। उसी सच्ची और भयावह घटना को आधार बनाकर प्रकाश झा ने गंगाजल बनाई।

फिल्म में अजय देवगन ने एसपी अमित कुमार का किरदार निभाया था जो शुरू में ईमानदार अफसर है लेकिन सिस्टम की गंदगी में धीरे-धीरे खुद बदल जाता है। उसका डायलॉग “जब तक पुलिस डंडे से डरती रहेगी तब तक अपराधी डंडे से नहीं डरेगा” आज भी लोगों को याद है।

नेशनल अवॉर्ड और बॉक्स ऑफिस का हिसाब

2004 में गंगाजल को सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। प्रकाश झा ने इसे खुद लिखा, डायरेक्ट किया और प्रोड्यूस भी किया। उस जमाने में फिल्म का बजट करीब सात करोड़ रुपये के आसपास था और इसने भारत में लगभग सोलह-सत्रह करोड़ का कारोबार किया। मतलब ना सुपरहिट ना फ्लॉप, बस ठीक-ठाक। लेकिन टीवी और बाद में ओटीटी पर आते ही यह कल्ट बन गई।

स्टारकास्ट भी था धांसू

अजय देवगन और ग्रेसी सिंह के अलावा फिल्म में मोहन जोशी, यशपाल शर्मा, मुकेश तिवारी, अखिलेंद्र मिश्रा, अनूप सोनी, अयूब खान, दयाशंकर पांडे और चेतन पंडित जैसे दमदार कलाकार थे। हर किरदार इतनी बारीकी से गढ़ा गया था कि आज भी याद आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।