Up Kiran, Digital Desk: अक्सर आपके साथ ऐसा होता होगा: आप दिन भर के काम से बुरी तरह थक चुके हैं और बस बिस्तर पर गिर जाना चाहते हैं। रात के 9-10 बजते-बजते आपकी पलकें भारी होने लगती हैं। आप सोचते हैं कि चलो अब सो जाते हैं, लेकिन किसी काम या फ़ोन की वजह से आप रुक जाते हैं। और फिर अचानक... 11 बजते ही आपकी नींद गायब हो जाती है, थकान छू-मंतर हो जाती है और आप पहले से कहीं ज़्यादा तरोताज़ा और ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने आपके अंदर एनर्जी का कोई बटन दबा दिया हो।
अगर यह आपको जाना-पहचाना लग रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। इस अनुभव को 'सेकंड विंड' इफ़ेक्ट (Second Wind Effect) कहा जाता है। यह सिर्फ़ एक एहसास नहीं, बल्कि इसके पीछे पूरा विज्ञान काम करता है।
क्या है यह सेकंड विंड?
'सेकंड विंड' उस अवस्था को कहते हैं जब बहुत ज़्यादा थकान या नींद आने के बाद अचानक से आपकी नींद भाग जाती है और आप फिर से तरोताज़ा और सतर्क महसूस करने लगते हैं। यह अक्सर धावकों (runners) के साथ भी होता है, जब वे दौड़ने के दौरान एक पॉइंट पर आकर पूरी तरह थक जाते हैं, लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उन्हें ऊर्जा का एक नया झोंका महसूस होता है और वे दौड़ते रहते हैं। लेकिन आज के समय में यह हमारी नींद के पैटर्न के साथ ज़्यादा जुड़ गया है।
आपकी नींद भागने के पीछे का विज्ञान
डॉक्टर्स के अनुसार, इस 'सेकंड विंड' के पीछे हमारे हॉर्मोन्स और शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (Body Clock) का खेल होता है।
क्या यह सेकंड विंड अच्छा है या बुरा?
थोड़ी देर के लिए यह 'सेकंड विंड' आपको अपना काम खत्म करने में मदद कर सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है।
कैसे बचें इस सेकंड विंड के जाल से?
सेकंड विंड को हराने का सबसे अच्छा तरीका है अपने शरीर के संकेतों को सुनना।
तो अगली बार जब रात को नींद आए, तो उसे टालने की बजाय गले लगाएं। आपका शरीर आपको इसके लिए धन्यवाद देगा।
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