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Up Kiran, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। भारत से होने वाले निर्यात पर 50 फीसदी तक का शुल्क लगाने के आदेश ने न सिर्फ़ नई दिल्ली को चौंकाया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है। आर्थिक असर से आगे बढ़कर अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है।
अमेरिकी संविधान क्या कहता है?
संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान की धारा II, सेक्शन 4 के मुताबिक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी शीर्ष सरकारी अधिकारी पद से हटाए जा सकते हैं यदि वे "राजद्रोह, रिश्वत या गंभीर अपराध" के दोषी पाए जाते हैं। इस प्रक्रिया को इम्पीचमेंट यानी महाभियोग कहा जाता है।
महाभियोग की कार्यवाही दो चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में जांच और बहस होती है। यदि हाउस साधारण बहुमत से आरोपों को सही मान लेता है, तो पूरा मामला सीनेट के पास पहुंचता है।
सीनेट में कठिन इम्तिहान
सीनेट में सुनवाई अदालत की तरह चलती है और अंतिम फैसला वहीं लिया जाता है। यहां राष्ट्रपति को दोषी साबित करने के लिए कुल दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। यही वजह है कि महाभियोग की प्रक्रिया कानूनी जितनी है, उतनी ही राजनीतिक भी मानी जाती है। बिना पर्याप्त राजनीतिक समर्थन के किसी भी राष्ट्रपति को पद से हटाना लगभग नामुमकिन है।
इतिहास गवाह है
अमेरिका के इतिहास में अब तक तीन राष्ट्रपति महाभियोग की जाँच का सामना कर चुके हैं। एंड्रयू जॉनसन, बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप (दो बार) के खिलाफ प्रतिनिधि सभा ने प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन तीनों ही मामलों में सीनेट में आवश्यक बहुमत न मिल पाने के कारण कोई भी राष्ट्रपति पद से नहीं हटाए गए।
यह उदाहरण दिखाते हैं कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन उसे मुकम्मल अंजाम तक पहुंचाना बेहद पेचीदा है।
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