Up Kiran, Digital Desk: तुर्की ने साफ शब्दों में कहा है कि उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में किसी भी तरह की जंगी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकू केसेली ने शनिवार रात सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यूक्रेन के ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। उनके मुताबिक केरोस और विराट नाम के दो रूसी तेल टैंकरों पर हुए हमले से नौवहन सुरक्षा को भारी खतरा पैदा हो गया है। मानव जीवन और पर्यावरण भी जोखिम में आ गया है।
ये हमले शुक्रवार रात को हुए। पहला जहाज केरोस तुर्की तट से महज 28 समुद्री मील दूर था। वो मिस्र से रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह की तरफ खाली जा रहा था। अचानक तेज धमाका हुआ और जहाज में आग लग गई। अच्छी बात ये रही कि जहाज पर मौजूद सभी 25 कर्मचारी पूरी तरह सुरक्षित हैं। तुर्की का बचाव दल उन्हें निकालने में जुटा हुआ है। यातायात मंत्रालय ने बाद में पुष्टि की कि सभी लोग सकुशल बाहर आ गए। हालांकि अगर आग नहीं बुझी तो जहाज डूब भी सकता है।
दूसरा टैंकर विराट तट से करीब 35 समुद्री मील दूर था। वहां इंजन रूम में धुआं भर गया और जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चालक दल ने तुरंत मदद मांगी। वहां भी 20 क्रू मेंबर पूरी तरह ठीक हैं। एक व्यापारी जहाज और तुर्की बचाव टीम मौके पर पहुंच चुकी है।
दोनों जहाज रूस की उस गुप्त बेड़े का हिस्सा हैं जिसे शैडो फ्लीट कहते हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस इसी बेड़े से तेल का कारोबार कर रहा है। ओपनसैंक्शंस डेटाबेस ने इसकी पुष्टि की है।
यूक्रेन ने बताई हमले की वजह
यूक्रेन ने खुलेआम स्वीकार कर लिया कि उसने अपने समुद्री ड्रोनों से ये दोनों हमले किए। कीव का कहना है कि रूस के तेल निर्यात को निशाना बनाना उसकी रणनीति का हिस्सा है। अब तक यूक्रेन के ड्रोन हमले ज्यादातर उत्तरी काला सागर में होते थे। पहली बार तुर्की के इतने करीब हमला हुआ है।
तुर्की निरंतर कहता आया है कि वो युद्ध को काला सागर के दक्षिणी हिस्से तक नहीं फैलने देगा। उसने सभी पक्षों से बात करके तनाव कम करने की कोशिश की है। लेकिन इस बार यूक्रेन की हरकत से अंकारा बेहद नाराज़ दिख रहा है। आने वाले दिनों में तुर्की की तरफ से और सख्त बयान या कदम उठाए जा सकते हैं।
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