Up Kiran, Digital Desk: उत्तराखंड के लाखों छात्रों के लिए अगले साल से बोर्ड परीक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने फैसला लिया है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों की परीक्षाओं में 20 प्रतिशत प्रश्न ऐसे होंगे जो सीधे किताबी जवाब नहीं मांगेंगे बल्कि छात्रों की सोचने समझने और विश्लेषण करने की ताकत को परखेंगे।
क्यों आया यह फैसला?
बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि अभी तक ज्यादातर छात्र रटकर परीक्षा पास कर लेते हैं लेकिन असल जिंदगी में काम आने वाली समझ और तर्क शक्ति का विकास नहीं हो पाता। नई व्यवस्था में प्रश्न ऐसे बनाए जाएंगे जिनका जवाब किताब की लाइनें कॉपी करने से नहीं मिलेगा। छात्र को पढ़ी हुई बात को समझकर उसका इस्तेमाल करना पड़ेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भविष्य में ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाएं चाहे इंजीनियरिंग की हों मेडिकल की या फिर यूपीएससी सभी इसी पैटर्न पर जा रही हैं। अगर हमारे छात्र दसवीं और बारहवीं से ही इस तरह की सोच विकसित कर लें तो आगे की राह आसान हो जाएगी।
हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल आखिर है क्या?
साधारण भाषा में समझें तो यह वह क्षमता है जिसमें छात्र सिर्फ याद न करे बल्कि जो पढ़ा है उसे विश्लेषण करे नई स्थिति में लागू करे और जरूरत पड़े तो नया समाधान भी निकाले।
उदाहरण के तौर पर अगर इतिहास में कोई घटना पढ़ाई गई है तो सवाल यह नहीं पूछा जाएगा कि वह घटना कब हुई बल्कि यह पूछा जाएगा कि अगर उस समय कोई एक फैसला अलग लिया जाता तो परिणाम क्या होते या आज की किसी समस्या को उस ऐतिहासिक घटना के नजरिए से कैसे समझा जा सकता है।
विज्ञान में फॉर्मूला रटने की बजाय यह देखा जाएगा कि छात्र उस फॉर्मूले को वास्तविक जीवन की किसी समस्या में लगा सकता है या नहीं।




