Up Kiran, Digital Desk: उत्तराखंड की शांत घाटियों में अक्सर विकास और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते रहे हैं और इस बार मामला सीधे जिंदगी और मौत से जुड़ा है। रुद्रप्रयाग जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में हुई एक घटना ने इस 'पहाड़ी प्रदेश' की सरकारी मशीनरी की नींद उड़ा दी है।
कल्पना कीजिए, रात के दो बजे हैं। गांव भटगांव (नगरासू) की नीमा देवी, पत्नी गुरुदेव सिंह, प्रसव पीड़ा से कराह रही हैं। परिजन तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन करते हैं। एंबुलेंस आती है, उम्मीद बंधती है, लेकिन यह उम्मीद चंद किलोमीटर बाद ही टूट जाती है।
नगरासू से महज़ दो किलोमीटर आगे शिवनंदी के पास, जीवनरक्षक माने जाने वाली यह एंबुलेंस अचानक ठप्प पड़ गई।
अंधेरी रात और रास्ते में बंद पड़ी एंबुलेंस! दूसरी एंबुलेंस को पहुंचने में लगभग एक घंटा लग गया। इस एक घंटे की देरी ने रुद्रप्रयाग की स्वास्थ्य व्यवस्था का सच सामने ला दिया। महिला के पास इंतज़ार करने का वक्त नहीं था। आखिरकार, उन्होंने उसी खराब एंबुलेंस में अपने बच्चे को जन्म दिया।
शुक्र है, जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और उन्हें जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया है। लेकिन, यह घटना सिर्फ 'शुभ अंत' वाली कहानी नहीं है। यह उन तमाम लोगों के लिए खतरे की घंटी है जो आज भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर हैं।
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