
waqf board amendment bill: वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, अब राज्यसभा की बारी है। चूंकि सत्तारूढ़ पार्टी के पास मामूली बहुमत है, इसलिए असली खेल राज्यसभा में खेला जाएगा। अधिकांश चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि वक्फ विधेयक में मुसलमानों के पक्ष में क्या है और उनके खिलाफ क्या है। हालांकि इस मुद्दे पर देश में दो गुट हैं, मगर आइए जानते हैं कि मुस्लिम देशों का इस विधेयक पर क्या कहना है।
यहां तक कि पड़ोसी दुश्मन पाकिस्तान से लेकर मित्र देश संयुक्त अरब अमीरात तक की मीडिया में इस वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई है। पाकिस्तान के जियो न्यूज के मुताबिक, वक्फ जमीन के प्रबंधन में बड़ा बदलाव होगा। सरकार और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।
कतर जैसे देशों में अग्रणी खाड़ी मीडिया आउटलेट अल जजीरा ने वक्फ विधेयक को विवादास्पद बताया है। बताया गया है कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत विवादास्पद विधेयक को लोकसभा में मंजूरी मिल गई है। 14 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की मुस्लिम संपत्तियों से संबंधित कानूनों में संशोधन किया जा रहा है। मुसलमानों को डर है कि इस फैसले से वक्फ संपत्तियों - ऐतिहासिक मस्जिदों, दुकानों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और हजारों एकड़ जमीन पर अतिक्रमण और अतिक्रमण बढ़ जाएगा। ये भी कहा गया है कि प्रस्तावित परिवर्तन भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन से लड़ने में मदद करेंगे।
यूएई के गल्फ न्यूज ने रिजिजू का बयान प्रकाशित किया है कि वह मुस्लिम समुदाय को निशाना नहीं बना रहे हैं। इसमें अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती का बयान और अखिलेश यादव तथा कांग्रेस नेता राशिद अल्वी जैसे कुछ नेताओं के बयान भी शामिल हैं।
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