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Up Kiran, Digital Desk: हर माता-पिता के दिल में एक सवाल बार-बार कौंधता है कि आखिर अपने लाड़ले को पहली बार स्कूल कब भेजा जाए। कोई जल्दी में होता है क्योंकि दोनों कामकाजी हैं तो बच्चे को सेटल करना चाहते हैं। कोई पड़ोस के बच्चे को यूनिफॉर्म में देखकर बेचैन हो जाता है। लेकिन सच यह है कि जल्दबाजी में लिया फैसला बच्चे के लिए भारी पड़ सकता है। आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंढते हैं कि बच्चे की स्कूल जाने की सही उम्र आखिर क्या है।

बच्चे तैयार हैं या हम तैयार करना चाहते हैं?

अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि ढाई से तीन साल की उम्र प्ले स्कूल या प्री-स्कूल शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त होती है। इस उम्र तक ज्यादातर बच्चे कुछ बुनियादी चीजें सीख चुके होते हैं। वो साफ-साफ दो-तीन शब्दों के वाक्य बोलने लगते हैं। खुद खाना खा लेते हैं। पॉटी आने की बात बता देते हैं। ये छोटी-छोटी बातें ही बताती हैं कि बच्चा अब घर से बाहर की दुनिया के लिए तैयार है।

अगर बच्चा अभी इन चीजों में कमजोर है और हम उसे जबरदस्ती स्कूल भेज देते हैं तो पहला अनुभव ही डरावना बन जाता है। वो रोता है। सहमा रहता है। और फिर स्कूल का नाम सुनते ही डरने लगता है।

सबसे बड़ी गलती जो आजकल हर दूसरा पैरेंट कर रहा है

आजकल एक ट्रेंड सा चल पड़ा है। जैसे ही बच्चा दो साल का होता है मम्मी-पापा उसे सीधे नर्सरी में डलवा देते हैं क्योंकि “अरे अब तो बड़ा हो गया। अब तो पढ़ना शुरू कर देगा।” लेकिन सच इससे बिल्कुल उल्टा है।

दो साल का बच्चा अभी खेल-खेल में सीखने की उम्र में होता है। उसे स्ट्रक्चर्ड पढ़ाई की जरूरत नहीं होती। उसे रंग पहचानने हैं। आकार समझने हैं। दूसरों के साथ शेयर करना सीखना है। ये सब प्ले स्कूल में ही अच्छे से होता है। सीधे नर्सरी में डाल देने से बच्चा दबाव महसूस करता है और कई बार सीखने से ही जी चुराने लगता है।

प्ले स्कूल क्यों जरूरी है? ये फायदे कोई नहीं बताता

शर्मीले बच्चे जो घर में चुप रहते हैं प्ले स्कूल में दोस्त बनाना सीखते हैं। जो बच्चे देर से बोलना शुरू करते हैं वो वहां जल्दी-जल्दी शब्द पकड़ लेते हैं क्योंकि दूसरे बच्चे बोल रहे होते हैं। खेलते-खेलते अनुशासन आता है। लाइन में खड़े होना। बारी का इंतजार करना। दूसरों की बात सुनना। ये सारी चीजें बाद में नर्सरी और केजी में बहुत काम आती हैं।

सबसे बड़ी बात आत्मविश्वास आता है। बच्चा समझ जाता है कि मम्मी-पापा के अलावा भी दुनिया में अच्छे लोग हैं। टीचर उससे प्यार करती है। दोस्त उसका साथ देते हैं। ये भावनात्मक सुरक्षा आगे की पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी होती है।