Up Kiran,Digitl Desk: वॉशिंगटन में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अमेरिका के सबसे बड़े और सम्मानित भारत विशेषज्ञों में से एक, एश्ले टेलिस को FBI ने गिरफ़्तार कर लिया. टेलिस वो शख़्स हैं, जिन्होंने दशकों तक भारत-अमेरिका के रिश्तों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है. ऐसे में उनकी गिरफ़्तारी, वो भी चीन के साथ गुपचुप मुलाक़ातों के आरोप में, अमेरिकी विदेश नीति के गलियारों में एक बड़े तूफ़ान की तरह आई है.
यह मामला किसी जासूसी थ्रिलर फ़िल्म की कहानी जैसा लगता है, जहां एक हीरो जैसा दिखने वाला किरदार अचानक विलेन के कटघरे में आ खड़ा होता है.
कौन हैं एश्ले टेलिस, जिनका वॉशिंगटन में था दबदबा?
एश्ले टेलिस कोई मामूली नाम नहीं हैं. वह कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित थिंक टैंक में एक सीनियर फेलो हैं. वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के विशेष सहायक रह चुके हैं और उन्होंने भारत के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते में भी अहम भूमिका निभाई थी.
सालों तक उन्होंने भारत पर अमेरिकी नीति को आकार दिया. उनकी लिखी रिपोर्ट और सलाह को व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय में बहुत गंभीरता से लिया जाता था. सीधे शब्दों में कहें तो, जब अमेरिका को भारत को समझना होता था, तो वो एश्ले टेलिस की ओर देखता था.
क्या हैं आरोप और क्यों है यह इतना गंभीर?
FBI का आरोप है कि टेलिस बिना सरकार को सूचित किए चीन के अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें कर रहे थे. अमेरिकी क़ानून (FARA - फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट) के तहत, अगर कोई व्यक्ति किसी विदेशी सरकार के लिए काम करता है या उसके निर्देशों पर किसी से मिलता है, तो उसे सरकार के पास ख़ुद को एक 'विदेशी एजेंट' के तौर पर पंजीकृत कराना होता है.
टेलिस पर आरोप है कि उन्होंने ऐसा नहीं किया. यह मामला सिर्फ़ एक क़ानूनी औपचारिकता का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है. अमेरिका को डर है कि चीन उसके प्रभावशाली थिंक टैंक और विशेषज्ञों को निशाना बनाकर ख़ुफ़िया जानकारी हासिल करने और उनकी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.
सबसे बड़ा सवाल: टेलिस ने ऐसा क्यों किया?
यही वो सवाल है जो इस वक़्त वॉशिंगटन में हर किसी की ज़ुबान पर है. टेलिस जैसे अनुभवी और सम्मानित व्यक्ति ने आख़िर यह जोखिम क्यों उठाया? क्या यह सिर्फ़ एक अकादमिक चर्चा थी जो ग़लती से सीमाएं लांघ गई? या इसके पीछे कोई बड़ा मक़सद, जैसे पैसे का लालच या किसी और तरह का दबाव था?
अभी तक इस मामले की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उनकी गिरफ़्तारी ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है. यह इस बात का संकेत है कि चीन का प्रभाव अब उन जगहों तक भी पहुंच गया है, जिनके बारे में पहले सोचा भी नहीं जा सकता था.
यह घटना भारत के लिए भी एक चेतावनी की तरह है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दुनिया कितनी जटिल और अप्रत्याशित हो सकती है.
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