Up kiran,Digital Desk : गाजा में शांति समझौते के सबसे मुश्किल दौर की बातचीत से पहले, हमास ने एक ऐसा बड़ा संकेत दिया है जो जंग की दिशा बदल सकता है। हमास ने कहा है कि वह अपने हथियार "फ्रीज" करने (यानी इस्तेमाल न करने) या उन्हें "स्टोर" करने (यानी सुरक्षित रखने) जैसे विकल्पों पर चर्चा के लिए तैयार है। यह चौंकाने वाला बयान हमास के एक वरिष्ठ नेता, बसम नईम, ने कतर की राजधानी दोहा में दिया, जहाँ हमास के बड़े नेता मौजूद हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दो साल से ज्यादा चली विनाशकारी जंग के बाद शांति की उम्मीदें दोबारा जगी हैं। याद दिला दें कि यह जंग 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले के बाद शुरू हुई थी, जिसमें 1,200 से ज्यादा इजरायली मारे गए थे। इसके जवाब में इजरायल की कार्रवाई में 70,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और पूरा गाजा शहर खंडहर में तब्दील हो गया है।
क्या है दूसरा चरण और क्यों हैं इतनी मुश्किलें?
शांति समझौते का पहला चरण बंधकों और कैदियों की अदला-बदली के साथ पूरा हो चुका है। लेकिन अब दूसरा चरण शुरू हो रहा है, जो बेहद जटिल और मुश्किल माना जा रहा है। इसमें कई बड़े और विवादित मुद्दों पर सहमति बनानी होगी, जैसे:
- अंतरराष्ट्रीय सेना की तैनाती: गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात किया जाएगा।
- गाजा का नया प्रशासन: गाजा को चलाने के लिए एक नई कमेटी बनाई जाएगी।
- इजरायली सेना की वापसी: इजरायली सेना गाजा से पूरी तरह बाहर निकलेगी।
- हमास का हथियार डालना: सबसे बड़ा और मुश्किल मुद्दा, हमास को अपने हथियार छोड़ने होंगे।
इन सभी मुद्दों की निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बोर्ड भी बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं।
हथियार छोड़ने पर क्या बोला हमास?
इजरायल की सबसे बड़ी शर्त यही है कि हमास पूरी तरह से हथियार डाल दे। इस पर हमास के नेता बसम नईम ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि "विरोध करना हमारा अधिकार है," लेकिन अगर 5 से 10 साल की एक सच्ची और गारंटी वाली शांति प्रक्रिया शुरू होती है, तो हथियारों को फ्रीज या स्टोर किया जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई सीधा सरेंडर नहीं होगा, बल्कि यह सब "फिलिस्तीनी गारंटी और सहमति" के आधार पर ही संभव है। यानी हमास हथियार छोड़ने को तैयार है, लेकिन इसके बदले में उसे एक स्वतंत्र और सुरक्षित भविष्य की ठोस गारंटी चाहिए।
बाकी मुद्दों पर भी फंसा है पेंच
- अंतरराष्ट्रीय सेना: हमास चाहता है कि गाजा में आने वाली अंतरराष्ट्रीय सेना का काम सिर्फ सीमाओं की निगरानी करना हो, उसे शहर के अंदर घुसकर कोई कार्रवाई करने का अधिकार न हो।
- गाजा का प्रशासन: इस मुद्दे पर थोड़ी प्रगति हुई है और हमास तथा फिलिस्तीनी प्राधिकरण के बीच गाजा का प्रशासन चलाने के लिए एक नई कमेटी बनाने पर सहमति बन रही है।
- आपसी अविश्वास: इन सब के बीच, दोनों पक्ष अब भी एक-दूसरे पर समझौते को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। इजरायल का कहना है कि उत्तरी गाजा में अब भी हमास के 200 लड़ाके छिपे हैं, जबकि हमास का दावा है कि इन लड़ाकों से उनका कोई संपर्क नहीं है।
साफ है कि शांति की राह आसान नहीं है, लेकिन हमास का अपने हथियारों पर चर्चा के लिए तैयार होना, इस खूनी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है
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